धीरे-धीरे बढ़ रही दरार
वैज्ञानिकों का कहना है कि दरार की प्रक्रिया फिलहाल धीमी है लेकिन यह लगातार हो रही है। इसे पूरी तरह से टूटने में लाखों साल लगेंगे। स्टडी से पता चलता है कि हर साल इसमें कुछ मिलीमीटर की हलचल हो रही है। स्टडी से पता चलता है कि न्यूबियन और सोमालियन प्लेटें उत्तर अरेबियन प्लेट से अलग हो रही है, जिसके Y आकार का रिफ्टिंग सिस्टम बन रहा है। ये प्लेटें इथियोपिया के अफार क्षेत्र में मिलती हैं, जिसे ट्रिपल जंक्शन कहा जाता है। यह धरती पर उन दुर्लभ जगहों में से एक है जहां तीन टेक्टोनिक रिफ्ट मिलते हैं। इनमें इथियोपियन, रेड सी और गल्फ ऑफ अदन रिफ्ट शामिल हैं।
प्लेटों के बीच जाने लगेगा समुद्र का पानी
वर्जीनिया टेक की जियोफिजिस्ट डी सारा स्टैम्पस ने बताया है कि दरार के बढ़ने की दर उत्तर में सबसे तेज है, इसलिए सबसे पहले वहीं महासागर का निर्माण होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इथियोपिया के अफार इलाके में धरती की ऊपरी परत पहले से ही पतली है। यहां जमीन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से नीचे है, जिसमें दरार की दो भुजाएं लाल सागर और अदन की खाड़ी में पहले ही डूब चुकी हैं। एक बार जब उन्हें जोड़ने वाली घाटी काफी नीचे चली जाएगी तो अलग हो रही प्लेटों के बीच समुद्र का पानी तेजी से जाने लगेगा। इस प्रक्रिया से एक नया महासागर बेसिन का निर्माण होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, हर साल प्लेटें एक दूसरे से लगभग 0.28 इंच दूर जा रही हैं। इस रफ्तार से पूरे महासागर बेसिन को भरने में दसियों लाख साल लगेंगे। हालांकि, यह दरार भूकंप और ज्वालामुखी के जरिए जिंदगी पर जल्दी असर डाल सकती है। पृथ्वी की ऊपरी परत 15-20 टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है जो धीरे-धीरे नीचे पिघले हुए मैग्मा मेंटल के ऊपर तैरती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अफार इलाक के नीचे एक मेंटल प्लम के नीचे है। यह गर्म पदार्थ का ऊपर उठता हुआ खंभा है जो पृथ्वी की ऊपर परत को फोड़ रहा है।














