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  • अफ्रीका में फंसा चीन का BRI तो ड्रैगन ने शुरू क‍िया नया गेम, अमेरिकी बादशाहत के लिए बड़ा खतरा

    बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) प्रोजेक्ट बीजिंग के गले की फांस बन गया है। ऐसा लग रहा है कि अफ्रीका महाद्वीप में चीन अपने BRI प्रोजेक्ट की रफ्तार कमजोर कर रहा है। ताजा आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल डेवलपमेंट पॉलिसी सेंटर से


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    By Azad Hind Desk जनवरी 23, 2026
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    बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) प्रोजेक्ट बीजिंग के गले की फांस बन गया है। ऐसा लग रहा है कि अफ्रीका महाद्वीप में चीन अपने BRI प्रोजेक्ट की रफ्तार कमजोर कर रहा है। ताजा आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल डेवलपमेंट पॉलिसी सेंटर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में अफ्रीकी देशों के लिए चीन के कर्ज लगभग आधा होकर 2.1 अरब डॉलर हो गया है। कोविड-19 महामारी के बाद यह पहली सालाना गिरावट है जो अफ्रीका में चीन की योजना के बारे में बहुत कुछ कहती है।

    2.1 अरब का आंकड़ा 2016 में पहुंचे चीन के उच्च स्तर का महज एक छोटा सा हिस्सा है, जब चीन ने 28.8 अरब डॉलर का कर्ज दिया था। ताजा आंकड़े बताते हैं कि चीन अब अरबों डॉलर के ढांचागत प्रोजेक्ट्स के युग से निर्णायक रूप से दूर जा रहा है। इसके बजाय बीजिंग का ध्यान अब छोटे, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा केंद्रित है।

    अफ्रीका में चीन ने बदला पुराना मॉडल

    साल 2012 से 2018 के बीच अफ्रीकी देशों के लिए चीन का कर्ज सालाना 10 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो रेलवे, राजमार्गों, बंदरगाहों और बिजली संयंत्रों जैसे बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट्स से संचालित था। इस फाइनेंसिग का एक बड़ा हिस्सा डॉलर में नामित किया जाता था। हाल के वर्षों में यह मॉडल दबाव में आ गया है। अब अमेरिकी डॉलर के बजाय इसे चीनी युआन में नामित किया जाता है।

    महामारी के आर्थिक झटके, बढ़ती ब्याज दरों चीनी कर्ज की कमजोरियों को उजागर किया। इथियोपिया, जाम्बिया, घाना जैसे देश कर्ज संकट में फंस गए। इसके बीजिंग को अपने कुछ कर्जों पर नुकसान का सामना करना पड़ा। इन अनुभवों ने बीजिंग के सोचने का तरीका बदल दिया है। चीन ने डॉलर पर आधारित बड़े प्रोजेक्ट्स से दूरी बना बनाई और छोटे पैमाने की फाइनेंसिंग पर ध्यान दिया। इसे अफ्रीकी वित्तीय संस्थानों के लिए FDI के तौर पर किया जाता है।

    डॉलर के खिलाफ चीन का दांव

    लेकिन जिस चीज ने विश्लेषकों का ध्यान खींचा है वह अफ्रीका में चीनी करेंसी युआन का बढ़ता इस्तेमाल है। चीन इन प्रोजेक्ट्स को डॉलर की काट और अपनी करेंसी युआन को आगे बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए कर रहा है। साल 2024 में केन्या को सभी लोन युआन में थे। अक्टूबर में चीन ने 3.5 अरब डॉलर के मौजूदा चीनी लोन को युआन में बदल दिया। इथियोपिया भी इसी तरह के बदलाव पर विचार कर रहा है।

    चीन ने बदली रणनीति

    कर्ज में भारी गिरावट से सवाल उठता है कि क्या चीन अफ्रीका से दूरी बना रहा है। एक्सपर्ट इसे इस तरह से नहीं देखते हैं। इसके बजाय वे एक रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करते हैं। बीजिंग कर्ज के जोखिमों को कम करने, डिफाल्ट को सीमित करने और विदेशी फाइनेंसिंग को मार्केट आधारित रिटर्न के साथ ज्यादा करीब से जोड़ने पर ध्यान दे रहा है। चीन की अफ्रीका रणनीति अब सिर्फ पैमाने के बारे में नहीं है। अफ्रीका में बड़े चीनी लोन के दिन खत्म हो सकते हैं। इसकी जगह छोटे और ज्यादा चुनिंदा जुड़ाव वाले टिकाऊ विकास को महत्व दिया जा सकता है।

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