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  • अमेरिका के साथ व्यापार समझौता ‘अबकी बार ट्रंप से हार’ का प्रमाण: कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा

    नई दिल्ली: कांग्रेस ने एक बार फिर अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र की मोदी सरकार का जमकर घेराव किया है। केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि यह समझौता ‘‘अबकी बार ट्रंप से हार’’ का प्रमाण है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड


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    By Azad Hind Desk फरवरी 22, 2026
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    नई दिल्ली: कांग्रेस ने एक बार फिर अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र की मोदी सरकार का जमकर घेराव किया है। केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि यह समझौता ‘‘अबकी बार ट्रंप से हार’’ का प्रमाण है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक शुल्क को रद्द किए जाने के फैसले के बाद उत्पन्न भ्रम की स्थिति को देखते हुए इसे ‘‘ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए।

    लेन-देन पर आधारित होता है कोई समझौता लेकिन…

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अंतरिम समझौते की रूपरेखा की शर्तों पर फिर से बातचीत होनी चाहिए और आयात उदारीकरण, विशेष रूप से कृषि उत्पादों के आयात उदारीकरण से संबंधित खंड को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि समझौता लेन-देन पर आधारित होता है, लेकिन भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत केवल दिया ही है।

    अबकी बार ट्रंप से हार

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में ह्यूस्टन में ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ का नारा दिया था, लेकिन अंतरिम समझौते की यह रूपरेखा ‘अबकी बार ट्रंप से हार’ का प्रमाण है। कांग्रेस नेता ने पूछा कि दो फरवरी को ऐसा क्या हुआ था कि प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति ट्रंप को व्यापार समझौते की घोषणा करने के लिए ‘‘मजबूर’’ करना पड़ा?

    कांंग्रेस नेता ने लगाया आरोप

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर संसद में प्रधानमंत्री पर बाह्य सुरक्षा मोर्चे की विफलताओं को लेकर राहुल गांधी के हमले से जुड़ा है। इसलिए इस समझौते की घोषणा खबरों और सुर्खियों को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा थी। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा में यह कहा गया है कि किसी भी पक्ष की ओर से किसी भी प्रकार के बदलाव की स्थिति में अमेरिका और भारत इस बात पर सहमत हैं कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी से हमारी मांग

    उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुल्क (टैरिफ) में बदलाव किया है, इसलिए भारत को अपनी प्रतिबद्धताओं में बदलाव करने का पूरा अधिकार है। हमने जो पहली प्रतिबद्धता जताई है, वह है खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क कम करना या समाप्त करना। प्रधानमंत्री से हमारी मांग है कि इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए।

    कांग्रेस सांसद ने किया दावा

    उन्होंने दावा किया कि भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर आयात शुल्क समाप्त करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि संयुक्त बयान में की गई इस प्रतिबद्धता को बदला जाना चाहिए क्योंकि इस बयान के अनुसार, भारत को ऐसा करने का पूरा अधिकार है।

    इन किसानों पर पड़ेगा सीधा असर

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पूछा कि ‘इस प्रतिबद्धता का सीधा असर सोयाबीन किसानों, मक्का किसानों, फल और मेवा उगाने वाले किसानों तथा कपास किसानों पर पड़ेगा। सबसे पहले इसका प्रभाव जम्मू कश्मीर, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा। फिर संयुक्त बयान में अतिरिक्त उत्पादों का जिक्र है। इसका क्या मतलब है?

    क्यों की इतनी जल्दबाजी

    उन्होंने कहा कि हमारा दूसरा सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री (पीयूष गोयल) को दिसंबर से ही पता था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कभी भी आ सकता है जिसमें कई लोगों का मानना था कि इसे रद्द किया जा सकता है। जब आपको पता था कि फैसला ट्रंप के खिलाफ जा सकता है, तो आपने इतनी जल्दबाजी में समझौता क्यों किया?

    इस एकतरफा सौदे पर करें पुनर्विचार

    कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इस मुद्दे को लेकर फैली व्यापक भ्रम की स्थिति को देखते हुए इस संयुक्त बयान को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए, हम शर्तों पर पुनर्विचार करें, यह एकतरफा सौदा है। इससे देश के विभिन्न राज्यों में लाखों किसानों के हितों को भारी नुकसान होगा।

    सभी प्रश्नों से बच रहे पीएम मोदी

    कांग्रेस महासचिव ने पूछा कि एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिकी विदेश मंत्री दावा कर रहे हैं कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है, लेकिन सरकार कह रही है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा, तो इन सभी मुद्दों पर स्पष्टता क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से जो कठिन प्रश्न पूछे जा रहे हैं, वह उन सभी प्रश्नों से बच रहे हैं।

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