दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी सरफेस वॉरशिप पर अमेरिकी सबमरीन का पहला ज्ञात अटैक है। वहीं साल 1982 में फॉकलैंड्स वॉर के दौरान चर्चिल क्लास HMS कॉन्करर के अर्जेंटीना नेवी क्रूजर ARA जनरल बेलग्रानो को डुबोने के बाद पूरी दुनिया में यह इस तरह का पहला एक्शन है। इससे समझा जा सकता है कि यह कितनी बड़ी घटना है।
Mk 48 टॉरपीडो का हुआ इस्तेमाल
बुधवार को पीट हेगसेठ के साथ प्रेस ब्रीफिंग में जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ यूएस एयर फोर्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि यही हमला एक फास्ट अटैक सबमरीन ने किया। इसमें एक Mk 48 टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया। समुद्री जहाज को तबाह करने के लिए पनडुब्बी से टॉरपीडो को दागा जाता है।
ईरान के मौज क्लास फ्रिगेट अलवंद क्लास से बने हैं। ये ईरान के सबसे मॉडर्न और काबिल सरफेस कॉम्बैटेंट में से हैं। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी हमलों में ईरानी अलवंद क्लास के वॉरशिप और उनके डेरिवेटिव को भी पोर्ट पर निशाना बनाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की नेवी को कमजोर करने की कोशिश की है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने क्या कहा है
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, ‘ईरान का एक युद्धपोत टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया गया है। हिंद महासागर में अमेरिका ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। उनको लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित हैं लेकिन उसे एक टॉरपीडो से डुबो दिया गया। हम ईरान को जल्दी ही कंट्रोल करेंगे।
जहाज के डूबने की कॉल मिलने के बाद श्रीलंका की नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। श्रीलंका सरकार ने ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले में 80 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। श्रीलंका नेवी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि जहाज के डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, जहाज पर 180 लोग सवार थे। श्रीलंका की नेवी ने 32 लोगों को बचा लिया। ऐसे में अभी भी करीब 60 से ज्यादा लोग लापता हैं।











