सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली मामले में एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट और कड़ी निगरानी पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम एक कमेटी बनाएंगे, जिसमें अपने-अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट होंगे। यह कमेटी अरावली को लेकर रिपोर्ट देगी। कमेटी कोर्ट के निर्देश और गाइडेंस में काम करेगी।
पूरे मामले में ‘सुप्रीम’ सुनवाई
राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस ओका बेंच के 2024 के आदेशों के बावजूद खनन पट्टे दिए जा रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने इस पर रोक की मांग की। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चिंता जताई और कहा कि अवैध खनन को रोकना होगा। यह एक अपराध है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों से कहा कि आपको अपनी मशीनरी को काम में लाना होगा, क्योंकि अवैध खनन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
सर्वोच्च अदालत का राज्य सरकारों को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा कि वह सुनिश्चित करें कि कोई गैरकानूनी खनन न हो। कोर्ट ने सभी पक्षकारों से पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और माइनिंग एक्सपर्ट्स के नामों को लेकर सुझाव मांगे। सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट किया कि ‘जंगलों’ और ‘अरावली’ को परिभाषित करने के सवाल की जांच अलग से की जाएगी।
अरावली की पहाड़ी का मामला कैसे गरमाया
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दोनों मुद्दे अलग-अलग चिंताएं उठाते हैं और उन पर अलग से विचार करने की जरूरत होगी। जब एमिकस अपना नोट जमा कर देंगे, तब इस मामले पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को अरावली की परिभाषा पर एक विस्तृत नोट फाइल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से जुड़े अपने पिछले निर्देशों को रोक दिया था।













