साल 1969 में उत्पल दत्त के अपोजिट ‘भुवन सोम’ से बॉलीवुड डेब्यू करने वाली सुहासिनी मुले ने जहां बड़े पर्दे पर ‘सड़क छाप’, ‘लगान’, ‘दिल चाहता है’, ‘जोधा अकबर’, ‘धमाल’ और ‘प्रेम रतन धन पायो’ जैसी 52 फिल्मों में काम किया है, वहीं टीवी पर ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘देवों के देव महादेव’, और ‘वरिसात’ जैसे 20 से अधिक पॉपुलर सीरियल का हिस्सा रही हैं।
‘इक्कीस’ में की गई युद्ध की खिलाफत तो लोगों ने कोसा
सुहासिनी मुले ने श्रीराम राघवन के डायरेक्शन में बनी ‘इक्कीस’ में महेश्वरी खेत्रपाल का किरदार निभाया है। यह दिवंगत दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म भी है। ‘इक्कीस’ एक वॉर ड्रामा बायोपिक तो है, लेकिन असल में एक एंटी-वॉर फिल्म भी है। यह एक बुनियादी सवाल पूछती है, ‘अगर खून-खराबा और ट्रॉमा नहीं, तो युद्ध क्या लाता है?’ इस कारण इसे ऑनलाइन खूब ट्रोल किया गया। दिग्गज एक्ट्रेस ने गुवाहाटी प्रेस क्लब में बात करते हुए इस पर चुप्पी तोड़ी है।
‘पाकिस्तानियों को ‘भूत और शैतान’ के रूप में नहीं दिखाया’
सुहासिनी मुले ने ‘इक्कीस‘ की तारीफ करते हुए इसकी तुलना ‘द कश्मीर फाइल्स’ से की और कहा, ‘मुझे स्क्रिप्ट राइटर ने बताया कि लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। अगर आप इस दौर में इस समाज में हैं, तो आपको ट्रोल किया जाएगा। इसलिए, आप ऐसी फिल्में नहीं बनाते हैं। आप ‘द कश्मीर फाइल्स’ बनाते हैं, तो आपको एंटरटेनमेंट टैक्स माफ हो जाएगा। आप क्यों ट्रोल हो रहे हैं, क्या सिर्फ इसलिए कि इसमें पाकिस्तानियों को ‘भूत और शैतान’ के रूप में नहीं दिखाया, बल्कि उन्हें ‘इंसान’ के रूप में दिखाया है।’
‘हिंसा का ऐसा प्रदर्शन मैंने पहले कभी नहीं देखा था’
दिग्गज एक्ट्रेस ने आगे कहा, ‘अब पॉलिटिकल सिनेमा वैचारिक रूप से दक्षिणपंथी है और धार्मिक वर्चस्व आम बात है। हिंसा का ऐसा प्रदर्शन हुआ है, जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था। यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के हैं। इसी देश के लोगों और अल्पसंख्यकों को ‘अन्य’ बना दिया गया है। यह एक बड़ा सवाल है, ऐसा सिर्फ मुसलमानों के साथ नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों के साथ हुआ है।’
श्रीराम राघवन ने ‘इक्कीस’ की ट्रोलिंग पर कही थी ये बात
बीते दिनों ‘स्क्रॉल’ के साथ बातचीत में श्रीराम राघवन ने भी ‘इक्कीस’ की रिलीज के बाद ट्रोलिंग पर बात की थी। उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी तरह से हैरान था। अलग-अलग तरह के लोग अलग-अलग तरह की फिल्में बनाते हैं। मैंने वह बनाया जो मेरे लिए सबसे अच्छा था, जिसमें हमें लगा कि यह लोगों को पसंद आएगा। मैं इसके या उसके पक्ष में नहीं हूं। मैं चाहता था कि लोग फिल्म देखने के बाद अपने दिल में एक खास भावना लेकर बाहर आएं। यह एक मानवीय भावना है।’














