आपको बता दें कि ईरान में 28 दिसंबर से खराब अर्थव्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। अब ये पूरे देश में फैल चुका है। ये प्रदर्शन अब सरकार विरोधी हो चुका है और इस्लामिक सरकार को गिराने के लिए लाखों लोग सड़कों पर आ चुके हैं। ईरान की इस्लामिक सरकार बेरहमी से प्रदर्शन को कुचलने की कोशिश कर रही है। ईरान मामलों पर नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान के इस्लामिक शासन के लिए ये प्रदर्शन एक गंभीर चुनौती है, लेकिन क्या सरकार गिरेगी, इसपर शक है।
इरफान सुल्तानी कौन है?
सोल्तानी तेहरान कराज के फरदीस के रहने वाले हैं। उन्हें 8 जनवरी को विरोध प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तार किया गया था। 26 साल के सुल्तानी पर ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ जैसा आरोप लगाया गया, जिसकी ईरान में बस एक ही सजा है, वो है मौत। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुल्तानी के परिवार को 11 जनवरी को फांसी की सजा मिलने की जानकारी दी गई है और 14 जनवरी, यानि बुधवार को उन्हें फांसी दी जाएगी। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सुल्तानी को सिर्फ 10 मिनट के लिए उनके परिवार से मिलने की इजाजत दी गई थी, वो भी कठोर पहरे में। हेंगाओ मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों ने कहा है कि सुल्तानी के खिलाफ ना तो कोर्ट में सही तरीके से मुकदमा चलाया गया और ना ही उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। उनके सारे मौलिक अधिकार छीन लिए गये थे और उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई।
सुल्तानी को ना तो वकील मुहैया करवाया गया और ना ही अपना बचाव करने का मौका दिया गया। सुल्तानी के परिवार ने कहा है कि उन्हें ये भी पता नहीं था कि सुल्तानी को कब गिरफ्तार किया गया, कब मुकदमा चलाया गया और किसने गिरफ्तार किया था। उन्हें सीधे फांसी की सजा मिलने की जानकारी दी गई। वहीं, सुल्तानी की बहन, जो एक वकील हैं, उन्हें सजा के खिलाफ अपील भी नहीं करने दिया गया और उनका केस लड़ने या सजा को चुनौती देने का अधिकार भी नहीं दिया गया। ईरान में लोकतंत्र के लिए नेशनल यूनियन (NUFD) का दावा है कि उनका “एकमात्र अपराध” आजादी की मांग करना था और उसने फांसी को रोकने के लिए इंटरनेशनल दखल की अपील की है।













