अगर ईरान-अमेरिका में यह टकराव आगे बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से माल की आवाजाही पर कोई रोक लगती है, तो भारत की सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, कतर और ओमान से कच्चे तेल और एलएनजी (प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत का आयात करता है, जो लगभग 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इसमें से 40 प्रतिशत से अधिक वेस्ट (पश्चिम) एशिया से इसी संकरे रास्ते से आता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत के पास कौन से विकल्प?
अधिकारियों ने बताया अगर होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होता है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भारत 360 किलोमीटर लंबी हबशान-फुजैराह रणनीतिक तेल पाइपलाइन और 1,200 किमी लंबी ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन के माध्यम से आंशिक रूप से आपूर्ति सुरक्षित करने का प्रयास कर सकता है। ये पाइपलाइन लाल सागर तक पहुंच प्रदान करती हैं। हबशान-फुजैराह पाइपलाइन को Adnoc संचालित करता है और इसकी क्षमता 1.5 mbpd है, जबकि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को Aramco नियंत्रित करता है और इसकी क्षमता 5 mbpd है।
74 दिनों तक चल सकता है भारत का रणनीतिक तेल भंडार
वहीं पिछले तीन सालों में भारत ने अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग एक तिहाई रूस से खरीदा है, लेकिन हाल के रुझानों से पता चलता है कि मॉस्को से तेल की हिस्सेदारी कम हो रही है। इस महीने सऊदी अरब से भारत की कच्चे तेल की खरीद छह साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि नई दिल्ली ने पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल के आयात में विविधता लाई है और उसके रणनीतिक तेल भंडार लगभग 74 दिनों तक चल सकते हैं।
बढ़ सकते हैं कच्चे तेल के दाम
रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ वीपी और सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ का कहना है, ‘प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि पर, भारत का वार्षिक आयात बिल 13-14 डॉलर बिलियन बढ़ जाएगा।’ हालांकि, तनेजा का मानना है कि स्थिति इतनी गंभीर नहीं होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना अमेरिका और खाड़ी के तेल निर्यातक देशों को स्वीकार्य नहीं होगा।













