इससे पहले वेनेजुएला में भी चीनी एयर डिफेंस सिस्टम और अमेरिकी फाइटर जेट आमने सामने थे। इसमें रूसी एयर डिफेंस बुरी तरह से फेल साबित हुए थे। रूसी S-300VM सिस्टम और Buk-M2E सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल भी अमेरिकी हमले को रोकने में नाकाम रही थी। अमेरिका ने अपने EA-18G Growler एयरक्राफ्ट की मदद से इलेक्ट्रोनिक वारफेयर को अंजाम दिया था। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान में अमेरिका को ज्यादा जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है जहां कई चरणों में एयर डिफेंस सिस्टम काम करते हैं।
चीन और रूस के एयर डिफेंस पर भरोसा कर रहा ईरान
वेनेजुएला के विपरीत ईरान लगातार अपनी क्षमताओं में विस्तार कर रहा है। ईरान ने चीन के HQ-9B और रूस के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया है जो लंबी दूरी तक सतह से हवा में हमला करने वाली मिसाइलों से लैस हैं। ऐसे में अमेरिका अगर हमला करता है तो उसे जोरदार पलटवार का सामना करना पड़ सकता है। एस-400 ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। वहीं HQ-9B चीन का सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है और अगर अमेरिका हवाई हमला करता है तो यह सिस्टम अहम भूमिका निभा सकता है।
चीन की बढ़ रही चिंता, अमेरिका को भी चेतावनी
ईरान अपनी सुरक्षा के लिए अब चीनी मिसाइल सिस्टम पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चीनी HQ-9B और रूसी एस-400 की मदद से ईरान का एयर डिफेंस बहुत ताकतवर हो चुका है। ऐसे में ईरान पर हमला करना अमेरिका को भारी पड़ सकता है। अमेरिका अगर पहले हवाई हमला करता है तो ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम बने रह सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप अगर अपने प्लान पर आगे बढ़ते हैं तो ईरान में अमेरिका और चीन के हथियारों की परीक्षा हो सकती है। ताइवान पर हमला करने के लिए चीन इस एयर डिफेंस सिस्टम पर काफी भरोसा कर रहा है। वहां भी उसका सीधा मुकाबला अमेरिका या उसके हथियारों से होना है।














