मालूम हो कि एलनाज नौरोजी 8 साल की उम्र तक तेहरान में रही थीं और फिर परिवार के साथ वहां से निकलकर जर्मनी चली गई थीं। इसके बाद उन्हें परिवार के साथ एक रिफ्यूजी कैम्प में रहना पड़ा। फिर एलनाज भारत आकर बस गईं, पर उनके कई रिश्तेदार अभी भी ईरान में ही हैं। वहीं, एलनाज को ईरान में कदम रखने या घुसने तक की भी इजाजत नहीं है। एलनाज नौरोजी ने हाल ही एक इंटरव्यू में ईरान के हालातों पर बात की, और कहा कि वह ईरान के मौजूदा शासन के खिलाफ हैं, देश के नहीं। साथ ही कहा कि जब तक मौजूदा सरकार सत्ता में है, तब तक वह घर नहीं लौट सकतीं।
एलनाज नौरोजी ने की ईरान के हालातों पर बात
एलनाज नौरोजी ने ‘बॉम्बे टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में ईरान पर अपना रुख स्पष्ट किया। साथ ही बताया कि उन्होंने खामेनेई की हत्या का सपोर्ट क्यों किया। वह बोलीं, ‘जब हम ईरान की बात करते हैं, तो मैं इस्लामिक रिपब्लिक, जिसने देश पर कब्जा कर रखा है, और ईरान के लोगों के बीच फर्क करना जरूरी हो जाता है। ईरान के ज्यादातर लोग समझदार और पढ़े-लिखे हैं, और उनकी मान्यताएं इस्लामिक रिपब्लिक की मान्यताओं से अलग हैं। एक समय ईरान के इजरायल के साथ अच्छे संबंध थे।’
‘इस्लामिक रिपब्लिक लगातार कहता रहता है कि इजरायल को नक्शे से मिटाना चाहता है’
एलनाज ने आगे कहा, ‘अगर आप साइप्रस द ग्रेट को देखें, जिन्होंने दुनिया का पहला मानवाधिकार चार्टर जारी किया था, वह फारसी थे और उन्होंने यहूदियों को बेबीलोन से मुक्त कराया था। शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के समय में भी हमारे अमेरिका के साथ अच्छे संबंध थे। यह सिर्फ इस्लामी गणराज्य है, जो लगातार कहता रहता है कि वह इजरायल को नक्शे से मिटाना चाहता है। एक महीने पहले, इस शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले कई ईरानियों को मार दिया गया था।’
एलनाज बोलीं- ईरान में कदम नहीं रख सकती, वो मुझे मार डालेंगे
मालूम हो कि एलनाज नौरोजी एक दशक से भी लंबे वक्त से अपने मुल्क ईरान नहीं लौटी हैं। वह 20s में ही भारत आकर बस गई थीं। एलनाज ने कहा कि वह अब ईरान वापस नहीं लौट सकतीं क्योंकि उन्हें हत्या का डर है। वह बोलीं, ‘मैं ईरान में कदम नहीं रख सकती। अगर मैंने ऐसा किया, तो वो मुझे मार डालेंगे। मैं ईरान नहीं जा सकी क्योंकि 2022 के आंदोलन के दौरान जो कुछ हुआ, उसमें 22 साल की ईरानी कुर्द महिला महसा अमिनी की हत्या कर दी गई थी। सितंबर 2022 में पुलिस हिरासत में उनकी मौत के बाद बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए। हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में नैतिकता पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई उनकी मौत दमन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गई। लोग सड़कों पर उतर आए और कहने लगे- हमें यह हिजाब नहीं चाहिए, यह हमारा नहीं है।’
‘जब खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाई तो परिवार डर गया था’
एलनाज नौरोजी ने आगे बताया, ‘उस समय मैंने खामेनेई और शासन के खिलाफ आवाज उठाई थी, और मेरा परिवार मेरी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हो गया था। अगर इस युद्ध में लोग मारे जाते हैं, तो मैं अयातुल्ला को दोषी ठहराऊंगी क्योंकि लोग कई बार सामने आकर कह चुके हैं कि हमें आप नहीं चाहिए, लेकिन वो नहीं गए। यह एक तानाशाही है। अगर आप आवाज उठाते हैं तो आपको जेल में डाल दिया जाता है।’
एलनाज ने खामेनेई की मौत पर खुशी जताते हुए कही थी यह बात
एलनाज नौरोजी ने हाल ही ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर खुशी जताई थी और एक वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि अगर इस जंग में एक भी नागरिक या सिविलियन मारा जाता है, तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ ईरान की सरकार जिम्मेदार होगी। एलनाज ने कहा था कि आम नागरिक के मारे जाने पर पूरी सत्ता को खत्म कर देना चाहिए क्योंकि वो पिछले 47 साल से ईरानियों पर जुल्म ढा रहे हैं और ईरान पर कब्जा कर रखा है। मालूम हो कि 28 फरवरी को इजरायल ने अमेरिका से साथ मिलकर ईरान पर मिसाइलों से हमला कर दिया, जिसमें काफी लोग मारे गए हैं और सुप्रीम लीडर खामेनेई भी मारे गए। युद्ध को चार दिन हो चुके हैं।
8 साल की उम्र में तेहरान से भागकर जर्मनी गईं
एलनाज नौरोजी ने एक बार साइरस ब्रोचा से बातचीत में बताया था कि कैसे तेहरान से जर्मनी भागकर जाने के बाद उन्हें परिवार संग रिफ्यूजी कैम्प में रहना पड़ा। वहा भी खाने को ढंग से नहीं मिलता था और घंटों तक लंबी लाइन में खड़े रहने के बाद सिर्फ एक अंडा और आलू खाने को मिलता था। एलनाज ने बताया था कि वह अमीर परिवार से नहीं थीं और काफी तकलीफें उठाईं। उनके पैदा होने के वक्त पैरेंट्स को तहखाने में रहना पड़ा था।














