रीयल टाइम इंटेलिजेंस
ईरान में किन ठिकानों पर हमला करना है, कौन सी न्यूक्लियर साइट कहां है, किस मिसाइल बेस पर क्या गतिविधि चल रही है, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांडर किस लोकेशन पर हैं, ऐसे डेटा अमेरिकी सेना के पास थे। ऐसे ही हजारों पन्नों के दस्तावेज, सैटलाइट इमेज और मानव खुफिया इनपुट को तेजी से पढ़कर उनका विश्लेषण करने में Claude AI का इस्तेमाल किया गया। किसी सैटलाइट इमेज में किसी न्यूक्लियर फैसिलिटी के आसपास असामान्य गतिविधि दिखी, तो Claude उस तस्वीर को पुराने रेकॉर्ड, खुफिया रिपोर्ट और पिछले पैटर्न से मिलाकर बता दिया कि यह सामान्य मूवमेंट है या सैन्य तैयारी।
टारगेट की पहचान
अमेरिकी सेना के सामने असली चुनौती यह थी कि इतने सारे संभावित लक्ष्यों में से किसे पहले निशाना बनाया जाए। सुप्रीम लीडर खामेनेई का ऑफिस और घर, न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल लॉन्च बेस, कमांड सेंटर, सैन्य गोदाम, हर जगह का अलग रणनीतिक महत्व था। Claude AI ने इन संभावित लक्ष्यों की वैल्यूऔर रिस्क का आकलन करने में मदद की। AI ने टारगेट्स को रैंक करने, क्रॉस वेरिफिकेशन करने और संभावित सिविलियन कैजुअल्टी को कम करने के लिए कई डेटा पॉइंट्स को जोड़कर सुझाव दिए। इससे अमेरिकी कमांडर्स को तेज और सोच समझकर फैसला लेने में मदद मिली।
युद्ध की प्रैक्टिस
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का सबसे बड़ा हिस्सा था ‘अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?’ अमेरिकी सेंट्रल कमांड की टीम को अंदेशा था कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन स्वार्मस हिजबुल्लाह या हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए जवाबी हमला कर सकता है। Claude AI का इस्तेमाल इन संभावित स्थितियों की सिमुलेशन चलाने में किया गया। AI ने 100 से ज्यादा संभावित युद्ध परिदृश्यों पर काम किया। जैसे, अगर ईरान 500 से ज्यादा मिसाइलें इस्राइल की ओर दाग दे तो डिफेंस सिस्टम कैसे प्रतिक्रिया देगा? अगर ईरान होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दे तो वैश्विक तेल सप्लाई पर क्या असर पड़ेगा? अगर अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमले बढ़ जाएं तो कौन सी सुरक्षा रणनीति सबसे कारगर होगी? इन सिमुलेशंस से कमांडर्स को पहले से तैयार रहने में मदद मिली और उन्होंने बैकअप प्लान मजबूत किया।
पोस्ट-स्ट्राइक एनालिसिस
हमले के बाद भी Claude AI की भूमिका अहम रही। स्ट्राइक के तुरंत बाद सैटलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज और खुफिया रिपोर्ट्स कमांड सेंटर तक पहुंचाई गई। इन सबके तेजी से विश्लेषण के बाद पुष्टि हुई कि टारगेट पूरी तरह नष्ट हुआ है या नहीं। Claude ने हमले से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना कर यह आकलन करने में मदद की कि कौन सी इमारतें या सिस्टम पूरी तरह खत्म हुए और क्या दोबारा कार्रवाई की जरूरत है। AI ने संभावित सेकंडरी डैमेज, जैसे आसपास के स्ट्रक्चर या सिविलियन इलाकों पर असर का भी विश्लेषण किया। साथ ही, ईरान की सैन्य गतिविधियों और कम्युनिकेशन संकेतों को देखकर संभावित जवाबी कार्रवाई का अनुमान लगाने में मदद की।
इतना अहम क्यों बन गया Claude?
WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, Claude पहले से ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्लासिफाइड नेटवर्क्स में इंटीग्रेटेड था।यानी यह सिर्फ एक बाहरी टूल नहीं था, बल्कि सैन्य सिस्टम का हिस्सा बन चुका था। इंटेलिजेंस प्रोसेसिंग, प्लानिंग और विश्लेषण में इसकी रीजनिंग कैपेबिलिटी इतनी अहम हो गई थी कि अचानक इसे हटाना आसान नहीं था। यही वजह बताई जा रही है कि प्रतिबंध के ऐलान के बावजूद अमेरिकी सेना में इसका इस्तेमाल तुरंत बंद नहीं हो सका। हालांकि अब सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ समझौता किया है। इसके तहत OpenAI अपने कुछ मॉडल्स को पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क पर तैनात करेगा। यानी जो काम अब तक Claude कर रहा था, लगभग वही काम OpenAI करेगा।














