इतना अहम क्यों बन गया Claude?
Claude पहले से ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्लासिफाइड नेटवर्क्स में इंटीग्रेटेड था। यानी यह सिर्फ एक बाहरी टूल नहीं था, बल्कि सैन्य सिस्टम का हिस्सा बन चुका था। इंटेलिजेंस प्रोसेसिंग, प्लानिंग और एनालिसिस में इसकी रीजनिंग कैपेबिलिटी इतनी अहम हो गई थी कि अचानक इसे हटाना अमेरिका के लिए आसान नहीं था। यही वजह है कि ट्रंप के बैन के ऐलान के बावजूद अमेरिकी सेना में इसका इस्तेमाल तुरंत बंद नहीं हुआ। हालांकि, अब सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ समझौता किया है। इसके तहत OpenAI अपने कुछ मॉडल्स को पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क पर तैनात करेगा। यानी जो काम अब तक Claude कर रहा था, लगभग वही काम OpenAI करेगा।
अमेरिकी हमले में 4 पॉइंट पर एंथ्रोपिक के Claude AI ने की मदद
1- रीयल टाइम इंटेलिजेंस
ईरान में किन ठिकानों पर हमला करना है, किस मिसाइल बेस पर क्या गतिविधि चल रही है, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांडर किस लोकेशन पर है, ऐसे डेटा अमेरिकी सेना के पास थे। ऐसे ही हजारों पन्नों के दस्तावेज, सैटलाइट इमेज और खुफिया इनपुट को तेजी से पढ़कर उनका विश्लेषण करने में Claude AI का इस्तेमाल किया गया। सैटलाइट इमेज में खामेनेई के ऑफिस के आसपास असामान्य गतिविधि दिखी, तो Claude उस तस्वीर को पुराने रेकॉर्ड, खुफिया रिपोर्ट और पिछले पैटर्न से मिलाकर बता दिया कि यह सामान्य मूवमेंट है या सैन्य तैयारी।
2- टारगेट की पहचान
अमेरिकी सेना के सामने असली चुनौती यह थी कि इतने सारे संभावित लक्ष्यों में से किसे पहले निशाना बनाया जाए। सुप्रीम लीडर खामेनेई का ऑफिस और घर, न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल लॉन्च बेस, कमांड सेंटर, सैन्य गोदाम, हर जगह का अलग रणनीतिक महत्व था। Claude ने इन संभावित लक्ष्यों की वैल्यू और रिस्क का आकलन करने में मदद की। AI ने टारगेट्स को रैंक करने, क्रॉस वेरिफिकेशन करने और आम लोगों के नुकसान को कम करने के लिए कई डेटा पॉइंट्स को जोड़कर
सुझाव दिए। इससे अमेरिकी कमांडर्स को तेज और सोच समझकर फैसला लेने में मदद मिली।
3- युद्ध की प्रैक्टिस
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का सबसे बड़ा हिस्सा था ‘अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?’ अमेरिकी सेंट्रल कमांड की टीम को अंदेशा था कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन स्वार्मस या प्रॉक्सी ग्रुप्स से जवाबी हमला कर सकता है। Claude का इस्तेमाल इन संभावित स्थितियों की सिमुलेशन चलाने में किया गया। AI ने 100 से ज्यादा संभावित युद्ध परिदृश्यों पर काम किया। जैसे, अगर ईरान 500 से ज्यादा मिसाइलें इस्राइल की ओर दाग दे तो डिफेंस सिस्टम कैसे प्रतिक्रिया देगा। अगर अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमले बढ़ जाएं तो कौन सी सुरक्षा रणनीति सबसे कारगर होगी।
4- पोस्ट स्ट्राइक एलालिसिस
हमले के बाद भी Claude की भूमिका अहम रही। कुछ रिपोर्टर्स में दावा किया गया कि स्ट्राइक के तुरंत बाद सैटलाइट तस्वीरें, ड्रोन फुटेज और खुफिया रिपोर्ट्स कमांड सेंटर तक पहुंचाई गई। Claude ने हमले से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना कर यह आकलन करने में मदद की कि दोबारा कार्रवाई की जरूरत नहीं है। AI ने संभावित सेकंडरी डैमेज, जैसे आसपास के स्ट्रक्चर या सिविलियन इलाकों पर असर का भी विश्लेषण किया। AI ने ईरान की सैन्य गतिविधियों और उनके कम्युनिकेशन संकेतों का भी अनुमान लगाया।














