मिडिल ईस्ट आई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका खाड़ी देशों की इंटरसेप्टर की सप्लाई के अनुरोध को पूरा करने में ‘अड़ंगा’ लगा रहा है। सऊदी जैसे देश ईरानी मिसाइलों को मार गिराने के लिए इंटरसेप्टर दाग रहे हैं जिससे उनका स्टॉक तेजी से कम होने लगा है।
अमेरिका पर मिसाइल इंटरसेप्टर नहीं देने का लगा आरोप
मिसाइल इंटरसेप्टर के प्रोडक्शन में लंबा वक्त लगता है। पिछले साल जून में ईरान के मिसाइल हमलों से बचाने में अमेरिका के THAAD एयर डिफेंस सिस्टम के 25 प्रतिशत स्टॉक खत्म हो गये थे। इस साल की लड़ाई में अमेरिका के ऊपर इजरायल के साथ अरब देशों को बचाने की भी जिम्मेदारी है।
इस मामले से परिचित एक पश्चिमी अधिकारी और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने मिडिल ईस्ट आई को बताया है कि US कुछ खाड़ी देशों की एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की सप्लाई फिर से भरने के अनुरोध पर “अड़ंगा” लगा रहा है। अमेरिका के ऊपर ईरानी मिसाइलों से इजरायल को बचाने का प्रेशर है।
खाड़ी के एक देश को इंटरसेप्टर पर नहीं मिला जबाव
ईरान के हमले के बाद एक खाड़ी देश (नाम का खुलासा नहीं) ने अमेरिकी अधिकारियों से मिसाइल डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर के खत्म होते स्टॉक को फिर से भरने के बारे में पूछताछ की लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उस देश के अनुरोध को टाल दिया है।
इसके अलावा एक और अरब देश, जिससे अमेरिका ने ईरान पर हमला करने के लिए उसके एयरबेस के इस्तेमाल की इजाजत मांगी तो उस देश ने अमेरिका से इंटरसेप्टर को लेकर उसकी प्रतिबद्धता के बारे में पूछ लिया। एक पश्चिमी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने MEE को बताया है कि अगर खाड़ी देश उम्मीद कर रहे हैं कि अमेरिका उनके खाली हो रहे भंडार को भरने वाला है तो उन्हें निराशा होगी। उस अधिकारी ने ये भी बताया है कि ‘पिछले कुछ महीनों में जो भी गोला-बारूद बनाया गया हमने पिछले कुछ दिनों में कई वर्षों के उत्पादन का काम पूरा कर लिया है।’
ईरान किन अरब देशों पर कर रहा है हमला?
सऊदी अरब, कुवैत, UAE, कतर और बहरीन को ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है। लेकिन ईरान के सबसे करीबी देशों जैसे बहरीन, कतर और UAE को इन हमलों का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।
UAE ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उसपर 871 ड्रोन, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल लॉन्च किए हैं जिनमें से 814 को इंटरसेप्ट किया गया। बाकी मिसाइलों और ड्रोन का असर हुआ है। युद्ध के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराने के लिए 2-4 से मिसाइल इंटरसेप्टर फायर किए जाते हैं। इसलिए स्टॉक तेजी से कम होता है।
अरब के कौन-कौन से देश अमेरिकी एयर डिफेंस करते हैं इस्तेमाल?
UAE अमेरिका का टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (Thaad) एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता है। यूएई, अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ पैट्रियट Pac-3 सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम भी चलाता है।
UAE के पास दक्षिण कोरियाई, रूसी और इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं। इसके अलावा उसके पास स्काईनाइट नाम का एक घरेलू शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम भी है। सऊदी अरब भी अमेरिकी एयर डिफेंस ही ऑपरेट करता है। कई अरब देश और अमेरिकी एयर डिफेंस पर निर्भर हैं।
इंटरसेप्शर बनाने में लगता है काफी समय
अमेरिकी कंपनियों के मुताबिक थाड और पैट्रियट इंटरसेप्टर काफी महंगे होते हैं। इन्हें बनाने में सालों लगते हैं। स्टिमसन सेंटर के एक्सपर्ट केली ग्रीको ने X पर लिखा है कि ‘UAE अब इंटरसेप्टर स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा खत्म कर चुका है जिसे बनाने में सालों लगे थे।’
हालांकि ट्रंप ने सोमवार को यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के साथ फोन पर बात की थी। कॉल के बाद एक अमीराती रीडआउट में कहा गया कि दोनों ने UAE और दूसरे गल्फ देशों पर “ईरान के खुलेआम हमलों” पर चर्चा की।
अमेरिका पर ईरानी मिसाइलों से इजरायल को बचाने का दबाव
बहरीन का कहना है कि उसने कम से कम 45 बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करके मार गिराया है। हालांकि अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर तो इनकार नहीं किया है लेकिन खाड़ी देशों को रिफिल मांगने से रोका गया है।
यूरेशिया ग्रुप में मिडिल ईस्ट डायरेक्टर फिरास मकसद ने अमेरिकी सोर्स का हवाला देते हुए MEE को बताया है कि USS गेराल्ड आर फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर सोमवार को मेडिटेरेनियन से खाड़ी के रास्ते की तरफ निकला है। इसका मकसद शायद अरब देशों पर होने वाले कुछ ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले को रोकना है।














