इस्लामिक क्रांति के बाद बड़ा विरोध प्रदर्शन
ईरान इस समय बड़े विरोध प्रदर्शन का सामना कर रहा है। यह 1979 की इस्लामिक क्रांति की याद दिलाता है जिसने तत्कालीन शाह रजा पहलवी के शासन का तख्ता पलट दिया था। हालिया विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत बीते साल के आखिर में 28 दिसम्बर को हुई, जब बढ़ती महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के बाद व्यापारी सड़कों पर उतरे। धीरे-धीरे आम लोग इससे जुड़ते गए और बीते गुरुवार की रात इसने उग्र रूप अख्तियार कर लिया।
ईरानी शासन ने विरोध प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों के ऊपर सीधे गोलियां चलाई हैं। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान देश भर में हुई हत्या के लिए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने खुद आदेश दिया था। सरकार की तीनों शाखाओं के प्रमुखों को आदेश की पूरी जानकारी और सहमति थी।
नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दी फायरिंग की इजाजत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलियों का इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और बासिज फोर्स ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। इस बीच ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों में दर्जनों सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। मारे गए सुरक्षाकर्मियों के लिए तेहरान में नमाज-ए-जनाजा रखा गया जिसमें बड़ी संख्या सरकार समर्थक लोग शामिल हुए।
इस बीच ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी ने ट्रंप और नेतन्याहू को ईरान के लोगों का मुख्य हत्यारा कहा। इसके पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया के माध्यम से संबोधित किया और उन्हें विरोध जारी रखने को कहा। ट्रंप ने यह भी कहा कि मदद आ रही है। हालांकि, यह मदद किस रूप में होगी, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया है। ट्रंप ने बार-बार कहा है कि अमेरिका ईरान में सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ईरान में अब तक क्या हुआ?
- ईरान में गुरुवार 8 जनवरी को आधी रात को उग्र प्रदर्शन शुरू हुए।
- देश भर में सार्वजनिक जगहों प्रदर्शनकारी जमा होने लगे।
- ईरान में गुरुवार रात में ही इंटरनेट और इंटरनेशनल कॉल बंद कर दी गई।
- गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक जगहों को आग लगानी शुरू कर दी।
- प्रदर्शनकारियों ने मस्जिदों तक को नहीं छोड़ा। 9 जनवरी को अबूजर मस्जिद में आग लगाई गई।
- मानवाधिकार समूहों ने सुरक्षाबलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली मारने का आरोप लगाया।
- ईरान में बुधवार 14 जनवरी तक 2500 से ज्यादा लोग मारे गए।
- 8 जनवरी के पहले एक सप्ताह तक चल प्रदर्शनों में 42 लोग मारे गए थे।














