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  • ऊंचे पदों पर बैठकर जमीनी हकीकत जाने बिना फैसले सुना देता है सुप्रीम कोर्ट, CJI सूर्यकांत ने क्यों की ये टिप्पणी

    नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक असामान्य टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-सुप्रीम कोर्ट ऊंचे स्थान पर बैठकर कई मौकों पर भारत की सामाजिक जमीनी हकीकतों की अनदेखी करते हुए और सामाजिक ताने-बाने पर उनके प्रतिकूल प्रभाव को समझे बिना व्यापक आदेश पारित करता है। सुप्रीम


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    By Azad Hind Desk फरवरी 28, 2026
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    नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक असामान्य टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-सुप्रीम कोर्ट ऊंचे स्थान पर बैठकर कई मौकों पर भारत की सामाजिक जमीनी हकीकतों की अनदेखी करते हुए और सामाजिक ताने-बाने पर उनके प्रतिकूल प्रभाव को समझे बिना व्यापक आदेश पारित करता है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आत्मनिरीक्षण जैसी है।

    पुलिस को FIR से पहले जांच की अनुमति का केस

    • टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) में राजद्रोह प्रावधान और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता(BNSS) में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच करने की अनुमति देने वाले प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची के पीठ के समक्ष हुई।
    • वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करने की अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट के 2014 के ललिता कुमारी फैसले का उल्लंघन है।
    • मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी 2013 के ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार केस से जुड़े आजाद सिंह कटारिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में की है।

    कभी-कभी फैसले ऊंचे पदों पर बैठकर सुनाए जाते हैं

    • लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ललिता कुमारी फैसले पर अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा-कभी-कभी फैसले ऊंचे पदों पर बैठकर सुनाए जाते हैं।
    • क्या आपने देखा है कि उस फैसले से किस तरह के मुकदमेबाजी का सिलसिला शुरू हुआ है? संज्ञेय अपराध का खुलासा होते ही एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य हो जाता है। इस देश में उस फैसले का कितना दुरुपयोग हुआ है?
    • सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-कई बार न्यायिक अदालतों का दुरुपयोग होता है। सभी झगड़ालू लोग दुरुपयोग करते हैं। हमारे समाज की परिस्थितियों, जमीनी हकीकतों और ग्रामीण समुदायों को जाने बिना, लोगों के जीवन को समझे बिना, हम कथित अधिकारों के नाम पर फैसले सुनाते रहते हैं, जिससे देश का ताना-बाना पूरी तरह से बिखर जाता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने ललिता कुमारी फैसले में क्या कहा था

    2014 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, लेकिन सीमित मामलों में प्रारंभिक जांच की जा सकती है।

    नए कानून को कुछ वक्त देना चाहिए: सीजेआई सूर्यकांत

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी नए कानून के प्रावधानों की वैधता का परीक्षण करने के लिए, उसके कामकाज को देखने के लिए कुछ वर्षों तक इंतजार करना चाहिए और खामियां पाए जाने पर उसे चुनौती दी जा सकती है।

    पुलिस नहीं जांचेगी तो और कौन जांचेगा

    • वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस के पास शिकायत की सत्यता निर्धारित करने का अधिकार कैसे हो सकता है?
    • पीठ ने कहा-अगर पुलिस एफआईआर में बदलने से पहले शिकायत की सत्यता तय नहीं कर सकती, तो और कौन करेगा? जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा-ललिता कुमारी फैसले के तहत वैवाहिक विवादों सहित कई श्रेणियों के मामलों में पुलिस को प्रारंभिक जांच का अधिकार दिया गया है। विधायिका ने इन अपराधों के लिए निर्धारित सजा की मात्रा के संबंध में कानून में इस पहलू को प्रतिबिंबित किया है। ऐसा प्रावधान ललिता कुमारी फैसले के विपरीत नहीं हो सकता।
    • गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि राजद्रोह का प्रावधान बीएनएस में तब भी शामिल किया गया जब केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ऐसा न करने का वचन दिया था। पीठ ने कहा-केंद्र सरकार ऐसा वचन दे सकती है, लेकिन संसद इससे बाध्य नहीं है।

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