केरल लिटरेचर फेस्टिवल में सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है और वह ‘माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने संसद में कांग्रेस के किसी भी रुख का किसी भी स्तर पर उल्लंघन नहीं किया है। एकमात्र मुद्दा जिस पर सिद्धांत के आधार पर सार्वजनिक तौर पर असहमति हुई है, वह ऑपरेशन सिंदूर है, जिस पर मैंने बहुत मजबूत रुख अपनाया था, और मुझे उस बारे में कोई पछतावा नहीं है।
दिल्ली में पार्टी की अहम बैठक में नहीं हुए थे शामिल
केरल विधानसभा चुनाव से पहले शुक्रवार को सीनियर कांग्रेस नेता ने राज्य नेतृत्व और AICC हाई कमान के साथ पार्टी की एक अहम मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे। दी। इसके बाद पार्टी के साथियों की तरफ से रिएक्शन आए थे। इसमें संदीप दीक्षित भी शामिल थे, जिन्होंने कहा कि तिरुवनंतपुरम के सांसद अब पार्टी के लिए ‘जरूरी’ नहीं रहे। पार्टी के साथ मनमुटाव की अटकलों के बीच कांग्रेस मीटिंग से अपनी गैरमौजूदगी पर सफाई देते हुए तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कहा कि चिंताओं को सार्वजनिक रूप से डिस्कस करने के बजाय सीधे पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाना बेहतर है।
उन्होंने कहा कि मीडिया में कई बातें सामने आई हैं – जिनमें से कुछ सच हो सकती हैं, कुछ नहीं – और ऐसे मामलों पर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर चर्चा नहीं होनी चाहिए,।उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने प्रोग्राम में शामिल न हो पाने के बारे में पार्टी को पहले ही बता दिया था। थरूर ने आगे कहा कि मुझे जो कुछ भी कहना है, वह पार्टी के अंदर ही कहूंगा।
पहलगाम हमले के बाद लिखा थे लेख
थरूर ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि एक पर्यवेक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम घटना के बाद एक अखबार में स्तंभ लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि इसकी सजा मिलनी चाहिए और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ऐसे में उसे पाकिस्तान के साथ लंबे टकराव में नहीं पड़ना चाहिए और कोई भी कार्रवाई आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाने तक सीमित होनी चाहिए।














