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  • ऑपरेशन सिंदूर में हार के बाद पाकिस्तान को कैसे करना पड़ा सैन्य और संवैधानिक संशोधन? CDS अनिल चौहान ने खोली पोल

    नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ी हुई थीं। यही वजह है कि उसे सैन्य से लेकर संवैधानिक संशोधनों को लेकर मजबूर होना पड़ा था। इस बात का जिक्र भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पाकिस्तान


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    By Azad Hind Desk जनवरी 10, 2026
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    नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ी हुई थीं। यही वजह है कि उसे सैन्य से लेकर संवैधानिक संशोधनों को लेकर मजबूर होना पड़ा था। इस बात का जिक्र भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। सीडीएस ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को संवैधानिक संशोधनों में जल्दबाजी करने और अपने उच्च रक्षा संगठन का पुनर्गठन करने के लिए मजबूर किया। ये सब इस बात का एक अप्रत्यक्ष संकेत था कि ये ऑपरेशन इस्लामाबाद के पक्ष में नहीं गया था।

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने क्या कहा

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) में आयोजित पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदम, जिसमें सैन्य कमांड आर्किटेक्चर में बदलाव शामिल हैं, उन गंभीर कमियों को दर्शाते हैं जो संघर्ष के दौरान सामने आईं। पाकिस्तान ने ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद खत्म कर दिया। उसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया है। साथ ही, नेशनल स्ट्रैटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड की भी स्थापना की है।

    कैसे बैकफुट पर आया पड़ोसी मुल्क

    जनरल चौहान ने बताया कि इससे एक ही व्यक्ति के हाथ में जमीन, संयुक्त और रणनीतिक सैन्य शक्तियों का केंद्रीकरण हो गया है। यह एकजुटता मूल सिद्धांत के खिलाफ है और भूमि-केंद्रित मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह का केंद्रीकरण पाकिस्तान के सैन्य सिस्टम में आंतरिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। क्या ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की अपनी कमांड संरचना में बदलाव को प्रेरित किया है, इस सवाल के जवाब में, सीडीएस ने दो टूक जवाब दिया।

    ऑपरेशन सिंदूर का भारत पर कितना असर

    सीडीएस ने स्पष्ट कहा कि वह तीनों सेवा प्रमुखों पर सीधे कमांड नहीं करते हैं, लेकिन यह पद परिचालन की जिम्मेदारी निभाता है। उन्होंने कहा कि चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के स्थायी अध्यक्ष के रूप में, निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, जिससे एकीकृत योजना और निष्पादन सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि CDS सीधे अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और कॉग्निटिव वारफेयर युद्ध जैसे उभरते परिचालन क्षेत्रों की देखरेख करता है, साथ ही इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तहत स्पेशल फोर्सेज की भी देखरेख करते हैं।

    दुनियाभर में कैसे बदल रही सैन्य रणनीति

    जनरल चौहान ने कहा कि दुनिया भर में सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। अब तकनीक युद्ध का मुख्य चालक बनती जा रही है, न कि भूगोल। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से, पानीपत से प्लासी तक, भूगोल ने सैन्य अभियानों को परिभाषित किया। आज, तकनीक रणनीति को चला रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य के संघर्षों में संपर्क रहित और गैर-घातक साधनों का अधिक इस्तेमाल की संभावना है।

    डोकलाम, बालाकोट का जिक्र कर क्या बोले CDS

    सीडीएस ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और पहले के टकरावों जैसे उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम और गलवान गतिरोध, और बालाकोट एयर स्ट्राइक से कई सबक सीखे गए हैं। खासकर हायर डिफेंस संगठनों से जुड़े एक्शन में ये स्पष्ट नजर आया। उन्होंने बताया कि ये ऑपरेशन इनोवेटिव, स्थिति के हिसाब से कमांड व्यवस्था के जरिए किए गए थे।

    उन्होंने कहा कि अब हम एक स्टैंडर्ड सिस्टम पर काम कर रहे हैं जिसे सभी इमरजेंसी स्थितियों में लागू किया जा सके। अब तक हुई प्रगति पर भरोसा जताते हुए, जनरल चौहान ने कहा कि ज्वाइंट थिएटर कमांड स्थापित करने के लिए ज्यादातर जमीनी काम पूरा हो गया है और उन्होंने उम्मीद जताई कि इंटीग्रेटेड कमांड स्ट्रक्चर तय समय सीमा से पहले लागू हो जाएगा।

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