यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और खाड़ी देशों से मदद मांगने की कोशिश कर रहा है। यही नहीं, पाकिस्तान समय-समय पर वर्ल्ड बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लोन लेता रहता है। पिछले महीने यानी दिसंबर में ही आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर देने की मंजूरी दी थी। इससे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को बड़ी राहत मिली है। यह पैसा पाकिस्तान को उसकी अर्थव्यवस्था को सुधारने में मदद करेगा। देश कई सालों से सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
Russian Oil: भारत ने बदल दिए दोस्त, रूस नहीं अब इन देशों से ज्यादा आ रहा तेल, अमेरिकी बैन के बाद लिया फैसला
यूएई से भी लगाई मदद की गुहार
पाकिस्तान सिर्फ वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ से ही नहीं बल्कि यूएई के सामने भी हाथ फैला रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में यूएई से एक बड़े कर्ज को चुकाने की समय सीमा बढ़ाने की गुहार लगाई है। यह 2.50 अरब डॉलर का कर्ज जल्द ही वापस करना था। यह कर्ज 2021 में हुए एक समझौते का हिस्सा है। इसे दो किस्तों में चुकाना था। कर्ज की यह रकम स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास जमा की गई थी।
यूएई की मदद से पाकिस्तान आईएमएफ को खुश रखना चाहता है ताकि उसे और कर्ज मिल सके। पाकिस्तान अभी भी आईएमएफ से 7 अरब डॉलर के लोन प्रोग्राम के लिए समर्थन मांग रहा है। यह दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था शायद उसकी विदेश नीति की महत्वाकांक्षाओं से थोड़ी कमजोर है। पिछले महीने वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को 700 मिलियन डॉलर (करीब 6270 हजार करोड़ रुपये) की नई वित्तीय सहायता मंजूर की थी। यह पैसा एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है जिसका मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाना है।
पाकिस्तान की मजबूरी या कुछ और?
एक तरफ जहां पाकिस्तान कर्ज में गले तक डूबा है, वहीं दूसरी तरफ वह शांति के वादे वाले एक बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर खर्च करने जा रहा है। यह पाकिस्तान की मजबूरी है या कुछ और? ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में आठ इस्लामिक देश शामिल हैं, और पाकिस्तान अब उनमें से एक है। विदेश मंत्री इशाक डार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह गाजा शांति योजना के प्रति पाकिस्तान के समर्थन के अनुरूप है। द ट्रिब्यून के अनुसार इशाक डार ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि यह बोर्ड स्थायी युद्धविराम को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने में मदद करेगा।’
पाकिस्तान पर कितना कर्ज?
पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। जून 2025 तक पाकिस्तान पर कुल कर्ज 286.832 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। पाकिस्तान पर घरेलू लोन का भी काफी बोझ है।













