पान मसाला निर्माताओं को 1 फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना होगा। ऐसे उत्पादों के निर्माताओं को सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली एक कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और इसकी फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा। उन्हें उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता की जानकारी भी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार कम से कम 15 दिनों तक बंद रहती है, तो वे उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकते हैं।
तंबाकू-सिगरेट पर एक्साइज से राज्यों को भी होगा फायदा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया पूरा प्लान
कितनी बढ़ जाएगी कीमत?
1 फरवरी से प्रभावी केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन कर सिगरेट की लंबाई के आधार पर 2.05 रुपये से 8.50 रुपये प्रति स्टिक तक उत्पाद शुल्क लगाया गया है। छोटी, बिना फिल्टर वाली सिगरेट (65 मिमी तक) पर हर स्टिक पर करीब 2.05 रुपये का अतिरिक्त टैक्स लगेगा। वहीं, छोटी फिल्टर वाली सिगरेट पर 2.10 रुपये प्रति स्टिक का टैक्स लगेगा। थोड़ी लंबी सिगरेट (65-70 मिमी) पर 3.6 से 4 रुपये प्रति स्टिक का टैक्स लगेगा। इससे भी लंबी सिगरेट (70-75 मिमी) पर 5.4 रुपये प्रति स्टिक का टैक्स लगेगा। सबसे ज्यादा, 8.50 रुपये प्रति स्टिक का टैक्स उन सिगरेट पर लगेगा जिनकी बनावट खास या अलग होती है। ज्यादातर जानी-मानी सिगरेट ब्रांड इस दायरे में नहीं आतीं।
चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर 82% एक्साइज ड्यूटी लगेगी। वहीं, गुटखा पर 91% टैक्स लगेगा। पान मसाले पर पहले की तरह 88% टैक्स ही रहेगा। यह नया टैक्स उत्पादन की मात्रा के बजाय बनाने की क्षमता के आधार पर लगेगा। सरकार ने ये नए टैक्स दिसंबर में संसद से पास करवा लिए हैं। यह फैसला GST काउंसिल ने सितंबर 2025 में लिया था, जब कंपनसेशन सेस का ढांचा खत्म हो गया था। इस टैक्स बढ़ोतरी का असर तुरंत देखने को मिलेगा। Crisil Ratings का अनुमान है कि अगले वित्तीय वर्ष में सिगरेट की बिक्री 6-8% कम हो जाएगी।












