ट्रंप के इस यू-टर्न को यूरोपीय देशों के ट्रेड बाजूका (Trade Bazooka) से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर दी गई धमकियों से यूरोपीय संघ (ईयू) हिल गया था। ईयू ने भी अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर ली थी। ईयू मुख्य रूप से एक व्यापारिक संगठन है। इसलिए, उसके पास ज्यादातर वित्तीय हथियार हैं। इनमें अमेरिका के सामानों पर भारी टैक्स लगाना या फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आए से बताए गए ‘ट्रेड बाजूका’ का इस्तेमाल करना शामिल है।
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क्या है ट्रेड बाजूका?
यह ईयू के एंटी-कोअरशन इंस्ट्रूमेंट (ACI) का एक छोटा नाम है। इसे ईयू का ट्रेड हथियार भी कहा जाता है। इसमें ऐसे कई उपाय शामिल हैं जिनसे उन देशों के व्यापार और निवेश को रोका या सीमित किया जा सकता है, जो ईयू के सदस्य देशों या कंपनियों पर अनुचित दबाव डालते हैं। इन उपायों में सामानों और सेवाओं के निर्यात और आयात को कम करना, देशों या कंपनियों को ईयू की सरकारी बोलियों में भाग लेने से रोकना या विदेशी निवेश को सीमित करना शामिल हो सकता है। सबसे गंभीर स्थिति में यह ‘बाजूका’ ईयू के 450 मिलियन ग्राहकों वाले बाजार तक पहुंच को पूरी तरह से बंद कर सकता है।
अमेरिका पर क्या असर?
अगर ईयू ट्रेड बाजूका का इस्तेमाल करता है तो अमेरिका का मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यह बाजूका अमेरिकी कंपनियों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचा सकता है।
यूरोपीय आयोग ने साल 2021 में इसे तब बनाया था जब चीन ने लिथुआनिया के साथ व्यापार पर रोक लगा दी थी। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि लिथुआनिया के ताइवान के साथ अच्छे संबंध थे, जिसे बीजिंग अपना हिस्सा मानता है। एक आयोग के बयान के अनुसार, ACI का मुख्य उद्देश्य डर पैदा करना है। इसलिए, यह तब सबसे सफल होगा जब इसे इस्तेमाल करने की जरूरत ही न पड़े।














