ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ रहा तनाव
यह थ्योरी तब सामने आई है जब ट्रंप ने हाल के दिनों में ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर बयानबाजी तेज कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस इलाके को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है। वहीं, डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिकी बयानबाजी का खुलकर विरोध किया है। डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो सब रुक जाएगा जिसमें NATO भी है।
ग्रीनलैंड को दहेज में लेने का प्लान
अब ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) अभियान के ऑनलाइन समर्थक दावा कर रहे हैं कि ट्रंप के सबसे छोटे बैरन ट्रंप (19) और डेनिश राजकुमारी इसाबेला (18) की शादी से यह समस्या हल हो जाएगी। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, आसान डिप्लोमैटिक समाधान यह है कि बैरन ट्रंप डेनमार्क की प्रिंसेज इसाबेला से शादी कर लें और ग्रीनलैंड को दहेज के तौर पर अमेरिका को दे दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो यह भारत में मुगल शासकों वाला तरीका होगा जिसमें हिंदू राजपूत राजाओं के यहां विवाह करके उन्हें राज्य को मुगल सल्तनत का हिस्सा बनाया।
ग्रीनलैंड पर कब्जे का अमेरिकी प्लान
हालांकि, इस दावे का कोई आधार नहीं है लेकिन यह ऐसे समय में आया है जब ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी तेज है। वॉइट हाउस ने कहा है कि ग्रीनलैंड को खरीदने पर विचार किया जा रहा है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के पास सैन्य इस्तेमाल का भी विकल्प है। 58000 की आबादी वाला ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्तशासी द्वीप है। खनिज से भरे इस आर्कटिक द्वीप पर अमेरिका की वर्षों से नजर है।
डेनमार्क की ग्रीनलैंड पर दो टूक
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने खुले शब्दों में कहा है कि डेनमार्क अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। सरकारी टीवी पर उन्होंने कहा, मैंने बहुत साफ कर दिया है कि डेनमार्क का क्या रुख है और ग्रीनलैंड ने बार-बार कहा है कि वह अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहता। उन्होंने आगे कहा, अगर अमेरिका किसी दूसरे NATO देश पर हमला करता है तो सब कुछ रुक जाएगा।
ट्रंप की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी को देखते हुए क्षेत्र में तनाव उभर रहा है। ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए डेनमार्क जिम्मेदार है, लेकिन इतने बड़े इलाके को कवर करने के लिए उसके पास सीमित संसाधन हैं। ट्रंप के सहयोगी एक विचार को बढ़ा रहे हैं, जिसमें ग्रीनलैंड को खरीदना एक विकल्प है। सबसे पहले राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने यह विचार 1946 में उठाया था। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने कहा है कि यह इलाका बिक्री के लिए नहीं है।














