‘घूसखोर पंडत’ का टीजर हाल ही ओटीटी प्लेफॉर्म नेटफ्लिक्स ने जारी किया था। इस साल की नई फिल्मों और उन सीरीज के साथ इस फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था, जो नेटफ्लिक्स पर आएंगी। तभी से ‘घूसखोर के टाइटल’ पर बवाल मचना शुरू हो गया। अब मथुरा में ब्रज के संतों में इस फिल्म को लेकर गुस्सा है और पीएम मोदी ने इस पर बैन लगाने की मांग की है। ब्रज भूमि के साधु-संतों ने फिल्म इंडस्ट्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, फिल्म पर बैन की मांग
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी, जिसमें ‘घूसखोर पंडत’ पर बैन लगाने की मांग बताते हुए आरोप लगाया कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर जानबूझकर ब्राह्मण समाज की छवि को धूमिल किया जा रहा है। दिनेश फलाहारी महाराज बोले, ‘ब्राह्मण समाज को कभी यूजीसी के बहाने कभी दलित उत्पीड़न के बहाने टारगेट किया जा रहा है। ब्राह्मण समाज ने हमेशा हिंदुस्तान को एक नई दिशा दी है। पहले राजा-महाराजाओं के यहां भी जो ऋषि-मुनि थे, वो सब ब्राह्मण थे। उन्हें शुभ कार्यों में बुलाया जाता था। सबसे बड़ी सलाह उन सनातनी ब्राह्मणों से ली जाती थी। लेकिन आज इस कलयुग में ब्राह्मण समाज को बदनाम करने के लिए ‘घूसखोर पंडत’ के नाम से फिल्म बनाई जा रही है।’
‘कुछ दबी मानसिकता के लोग ब्राह्मणों के पीछे पड़े हैं’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमारी भारत सरकार से मांग है कि ऐसे लोगों पर देशद्रोह की कार्रवाई करें। और इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाएं। इस फिल्म को बनाने वालों पर जब तक कार्रवाई नहीं होगी,तब तक ये लोग मानेंगे नहीं। हमारे देश में ब्राह्मण समाज न होता, तो ये जो कार्यक्रम होते हैं…दुख में, सुख में, सभी वेद-पाठों और ग्रंथों के द्वारा…ब्राह्मण समाज के लोगों के द्वारा ये काम किए जाते हैं, लेकिन कुछ दबी मानसिकता के लोग ब्राह्मणों के पीछे पड़े हैं। इसलिए मोदी जी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि इस फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पर देशद्रोह की कार्रवाई करें।’
रामराज्य में पूजन कलयुग में अपमान!
वहीं, दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में लिखा बै कि जब रामराज्य था, तब ब्राह्मणों की सलाह के बिना कोई भी शुभ कार्य संपन्न नहीं होता था। ब्राह्मण संपूर्ण विश्व के लिए पूजनीय हैं, लेकिन आज कुछ विधर्मी मानसिकता के लोग चंद रुपयों के लालच में इस समाज के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि ब्राह्मण समाज को पहले ही आरक्षण जैसी मुख्यधारा की सुविधाओं से वंचित रखा गया है, और अब फिल्मों के जरिए उन्हें अपमानित किया जा रहा है।
‘डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के खिलाफ देशद्रोह की कार्यवाई की जाए’
विवाद सिर्फ फिल्म के नाम तक सीमित नहीं है। संतों ने सरकार से मांग की है कि इस फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के खिलाफ देशद्रोह की कार्रवाई की जाए। दिनेश फलाहारी महाराज के मुताबिक, ऐसी फिल्में समाज में विद्वेष फैलाती हैं और सनातन धर्म के स्तंभों को कमजोर करने का प्रयास करती हैं। फलाहारी महाराज ने पीएम मोदी को पत्र में लिखा है- आप हमारे सनातन हिंदुओं के गौरव हैं, इसलिए हमें विश्वास है कि आप इस ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म पर तुरंत बैन लगाएंगे।
क्या है संतों की नाराजगी की बड़ी वजह?
दरअसल, ‘घूसखोर’ शब्द को पंडित के साथ जोड़ना समाज का अपमान माना जा रहा है। संतों का सवाल है कि फिल्म इंडस्ट्री केवल हिंदू प्रतीकों और ब्राह्मणों को ही निशाना क्यों बनाती है? चिट्ठी में कहा किया गया है कि ऐसी फिल्मों से समाज में जातिगत वैमनस्य बढ़ सकता है।
‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल पर भड़क गए यूजर्स भी, सोशल मीडिया पर गुस्सा
वहीं, ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर भी यूजर्स भड़क गए थे। उन्होंने भी यह कहते हुए मेकर्स ने फिल्म का टाइटल बदलने की मांग की थी कि यह जातिवाद फैलाने वाला है और एक विशिष्ट वर्ग को अपमानित करता है। यूजर्स ने यह तक कहा था कि अगर फिल्म का टाइटल नहीं बदला गया, तो इसका बायकॉट किया जाएगा। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना था कि ब्राह्मणों को घटिया स्टीरियोटाइप के लिए निशाना बनाना सही नहीं है। यह जातिगत नफरत है।
यहां देखिए ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर:
भोपाल में भी बवाल, सड़कों पर ब्राह्मण समाज, की FIR की मांग
उधर, भोपाल में भी ‘घूसखोर पंडत’ के कारण बवाल मच गया। गुरुवार, 5 फरवरी को ब्राह्मण समाज सड़कों पर उतर आया और फिल्म का विरोध किया। उन्होंने मेकर्स के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और FIR की भी मांग की। ‘न्यूज18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल में ब्राह्मण समाज ने चेतावनी दी कि अगर फिल्म रिलीज हुई तो पूरे देश में प्रदर्शन होगा। उन्होंने नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी को ब्राह्मणों के नाम पर कलंक बताया।
‘घूसखोर पंडत’ के मेकर्स को लीगल नोटिस
बात यहीं नहीं रुकी है। मुंबई के एक वकील ने भी ‘घूसखोर पंडत’ पर कड़ा एतराज जताया है और मेकर्स को कानूनी नोटिस भिजवा दिया है। मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने यह नोटिस भेजा है और मेकर्स से मांग की है कि फिल्म के टाइटल को तुरंत हटा दिया जाए। उनका कहना है कि पंडित जैसे शब्द को घूसखोर से जोड़ना पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा और छवि को ठेस पहुंचाता है और यह गैर जिम्मेदाराना भी है।














