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  • चीन की दुखती रग के पास गरजे भारतीय सुखोई और ग्रिपेन लड़ाकू विमान, मलक्का स्ट्रेट के नाम से क्‍यों डरता है ड्रैगन?

    नई दिल्ली/बैंकॉक: मलक्का स्ट्रेट, जिससे चीन सबसे ज्यादा डरता है, वहां भारत ने थाईलैंड की वायुसेना के साथ ज्वाइंट ड्रील की है। भारतीय वायुसेना के Su-30 MKI लड़ारू विमानों ने थाईलैंड एयरफोर्स के ग्रिपेन लड़ाकू विमानों के साथ ड्रील की है। सबसे खास बात यहां पर ग्रिपेन लड़ाकू विमान है, जिसका ऑफर स्वीडन की कंपनी


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    By Azad Hind Desk फरवरी 12, 2026
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    नई दिल्ली/बैंकॉक: मलक्का स्ट्रेट, जिससे चीन सबसे ज्यादा डरता है, वहां भारत ने थाईलैंड की वायुसेना के साथ ज्वाइंट ड्रील की है। भारतीय वायुसेना के Su-30 MKI लड़ारू विमानों ने थाईलैंड एयरफोर्स के ग्रिपेन लड़ाकू विमानों के साथ ड्रील की है। सबसे खास बात यहां पर ग्रिपेन लड़ाकू विमान है, जिसका ऑफर स्वीडन की कंपनी साब ने भारत को दिया है। स्वीडिश कंपनी ने भारतीय वायुसेना को अपने मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के लिए अपना ग्रिपेन-E/F लड़ाकू विमान का प्रस्ताव दिया है? क्या भारत, स्वीडिश फाइटर जेट को परखने की कोशिश कर रहा है।

    भारतीय वायुसेना की तरफ से 10 फरवरी को कहा गया है कि “भारतीय वायुसेना, रॉयल थाई एयर फोर्स के साथ एक ज्वाइंट इन-सीटू एयर एक्सरसाइज कर रही है। इस एक्सरसाइज से दोनों एयर फोर्स के बीच ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी। IAF Su-30MKI, AWACS, AEW&C और IL-78 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट, RTAF ग्रिपेन एयरक्राफ्ट के साथ मिलकर इस एक्सरसाइज में हिस्सा ले रहे हैं, जिससे इंडो-थाई डिफेंस कोऑपरेशन और रीजनल सिनर्जी मज़बूत होगी।”

    मलक्का स्ट्रेट के पास भारतीय वायुसेना की ड्रिल
    मलक्का स्ट्रेट से ही दुनिया भर के समुद्री व्यापार का लगभग एक-चौथाई और दुनिया के तेल और नेचुरल गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके अलावा, मलक्का स्ट्रेट को ही हिंद महासागर का दरवाजा भी कहा जाता है। खासकर चीन के लिए ये काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। चीन के ऊर्जा की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और ये अंडमान निकोबार के काफी करीब है। भारत, मलक्का स्ट्रेट को चॉक कर चीन के सप्लाई लाइन को काट सकता है। इसीलिए चीन इससे काफी डरता है। मलक्का स्ट्रेट, पानी का एक पतला हिस्सा है, जो सिर्फ 65-250 किलोमीटर चौड़ा है, जिससे पड़ोसी देशों के लिए किसी संभावित लड़ाई के दौरान इसे बंद करना आसान हो जाता है।

    इसे चीन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती माना जाता है। क्योंकि यह इंडोनेशिया, सिंगापुर और भारत जैसे अमेरिका के खास सहयोगियों से घिरा हुआ है। इंडो-थाईलैंड ड्रिल में दोनों तरफ के फ्रंटलाइन जेट शामिल किए गये थे। भारतीय वायुसेना ने अंडमान और निकोबार आइलैंड्स के बेस से ऑपरेट करने वाले Su-30MKI मल्टीरोल फाइटर्स तैनात किए थे। ताकि लंबी दूरी के ऑपरेशन किए जा सकें। वहीं, थाईलैंड एयरफोर्स ने थाई एयर बेस से लॉन्च किए गए JAS 39 ग्रिपेन फाइटर्स के साथ हिस्सा लिया था। ये एयरक्राफ्ट मलक्का स्ट्रेट के उत्तरी इलाकों में हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग के लिए जमा हुए थे।

    भारत के लिए काफी अहम है मलक्का स्ट्रेट
    मलक्का स्ट्रेट वाले क्षेत्र में भारत का प्रभुत्व है। जबकि इस ड्रिल में ग्रिपेन फाइटर्स को शामिल किया गया था। थाईलैंड एयरफोर्स के पास ग्रिने फाइटर जेट हैं, जिसने पिछले साल कंबोडिया के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया था। इसी जेट के एडवांस वैरिएट को स्वीडन ने भारत को ऑफर किया है। इसीलिए इस ड्रिल का महत्व कुछ अलग है। साब ने ग्रिपेन-E के बारे में बताया है कि “इसे किसी भी दुश्मन को हराने के लिए डिजाइन किया गया। आगे की सोच वाली एयर फोर्स के लिए डिजाइन किया गया, ग्रिपेन E में कटिंग-एज टेक्नोलॉजी और लेटेस्ट सिस्टम, सेंसर, हथियार और पॉड्स हैं ताकि लड़ाई में फायदा हो और बहुत मुश्किल माहौल में हवाई वर्चस्व हासिल हो।”

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