प्रचंड पचासा: महासागरों में दहाड़ती हैं हवाएं
मौसम को अलग रंग देने वाली ये हवाएं महासागरों में दहाड़ती हुई चलती हैं। उत्तरी गोलार्ध में ये दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर और दक्षिणी गोलार्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है| इनकी दहाड़ इतनी खतरनाक होती है कि पुराने समय कई बार नाविक अपनी नौकाएं छोड़कर पानी में कूद जाते थे। प्रचंड पचासा बेहद शोर करने वाली और दहाड़ने वाली हवाएं होती हैं।
प्रचंड पचासा की स्पीड महासागरों में बढ़ जाती है
प्रचंड पचासा ( Furious Fifties ) दक्षिणी गोलार्ध ( Southern Hemisphere ) में 50 डिग्री से 60 डिग्री दक्षिण अक्षांशों (latitudes) के बीच चलने वाली बहुत तेज पछुआ पवनों ( westerly winds ) को कहते हैं। चूंकि विशाल महासागर में ये चलती हैं तो इनकी स्पीड बहुत तेज होती जाती है। ये गरजती-बरसती हुई चलती हैं। इनका ये नाम नाविकों द्वारा दिया गया है।
धरती के उत्तरी हिस्से में दिशा से भटक जाती हैं ये हवाएं
उत्तरी गोलार्ध में असमान उच्चदाब वाले विशाल पहाड़ा और वायुदाब में बदलावा के चलते इन हवाओं का सामान्य पश्चिमी दिशा से प्रवाह अस्पष्ट हो जाता है। ध्रुवो की ओर इन पवनो की सीमा काफी अस्थिर होती है, जो मौसम एवं अन्य कारणों के अनुसार परिवर्तित होती रहती है।
जहाज चलाने के लिए खतरनाक थीं ये हवाएं
पुराने समय में नाविक इन तूफानी हवाओं के कारण इन हवाओं को इसी तरह के नाम से पुकारते थे क्योंकि ये हवाएं बहुत शोर करती थीं और नौकायन के लिए खतरनाक थीं। पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली इन हवाओं का यह प्रवाह भूमध्य रेखा से वायु के दक्षिणी ध्रुव की ओर जाने से और पृथ्वी के घूमने से बनता है।
यूरोप से ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए सफर होता था आसान
गरजता चालीसा हवाओं से यहां की लहरे भी कभी-कभी तेज वायु प्रवाह के चलते ज्यादा ऊंचाई पकड़ लेती हैं। इन लहरों के बावजूद मशीनीकरण के युग से पूर्व यूरोप से ऑस्ट्रेलिया जाने वाली नौकाएं 40 से 50 डिग्री से आगे दक्षिण आकर अपने पालों द्वारा इन गतिशील हवाओं को पकड़कर तेजी से पूर्व की ओर जाने का लाभ उठाया करती थीं। वहीं, प्रचंड पचासा के दौरान सफर करने से बचते थे।
पहाड़ से कम, महासागरों में ज्यादा सफर करती हैं ये हवाएं
50 डिग्री दक्षिण और 60 डिग्री दक्षिण अक्षांशों के बीच बहुत कम भूभाग है और इसका अधिकांश भाग खुला महासागर है। इन हवाओं में पहाड़ या अन्य भू-आकृतियां नहीं होतीं जो इन्हें रोक सकें, जिससे इनकी शक्ति बढ़ जाती है।
प्रचंड पचासा और पश्चिमी विक्षोभ में कोई संबंध नहीं
पश्चिमी विक्षोभ और प्रचंड पचासा में सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि ये दोनों अलग-अलग गोलार्द्धों और अक्षांशों की मौसमी परिघटनाएं हैं। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से पैदा होती हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में सर्दी में बारिश लाती हैं। वहीं, प्रचंड पचासा पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध (50 डिग्री से 60 डिग्री के बीच दक्षिण) में चलने वाली ताकतवर पछुआ हवाएं हैं।














