यह मामला एक महिला और उसकी छोटी बेटी से संबंधित है, जिन्होंने कथित तौर पर उस व्यक्ति द्वारा डांटे जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। जस्टिस सी प्रदीप कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कासरगोड के बारा निवासी सफवान अधुर को बरी कर दिया, जिसके खिलाफ स्थानीय अदालत ने आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और धारा 204 के तहत साक्ष्य नष्ट करने का आरोप तय किया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार अधुर का एक विवाहित महिला के साथ संबंध था। जब मृतका को पता चला कि वह किसी दूसरी महिला से शादी करने की योजना बना रहा है, तो उसने इस बारे में सवाल किया और दोनों के बीच बहस हुई। इस दौरान उसने कथित तौर पर उसे चली जा और मर जा कहा।
15 सितंबर, 2023 को महिला और उसकी साढ़े पांच वर्षीय बेटी ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद कासरगोड के मेलपरम्बा पुलिस स्टेशन ने अधुर के खिलाफ मामला दर्ज किया। कासरगोड की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अधुर की बरी होने की याचिका खारिज कर दी और उसके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला किया।
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में ‘चली जा और मर जा’ शब्द मौखिक बहस के दौरान, आवेश में आकर कहे गए थे, मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई इरादा नहीं था। इसलिए आईपीसी की धारा 306 के तहत अपराध नहीं बनता है। न्यायालय ने आगे कहा कि चूंकि आरोपों से आईपीसी की धारा 306 के तहत कोई अपराध नहीं बनता, इसलिए आईपीसी की धारा 204 के तहत आरोप भी मान्य नहीं होगा। हाई कोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को पलट दिया।













