ट्रंप का कहना है कि ब्रिटेन का यह फैसला उनके ग्रीनलैंड को लेने के इरादे के पीछे की वजहों में से एक है। हालांकि, पहले अमेरिका ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए इस समझौते का समर्थन किया था।
ट्रंप की इस टिप्पणी ने ब्रिटेन की राजनीति में भी बहस छेड़ दी है। ब्रिटेन की सरकार ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चागोस द्वीप समूह संधि की मंजूरी पर होने वाली बहस को फिलहाल रोक दिया है। पिछले साल, भारत और मॉरीशस के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान एक अहम बात यह हुई थी कि भारत ने मॉरीशस को उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) का सर्वेक्षण करने में मदद की पेशकश की थी। चागोस द्वीप समूह के मॉरीशस में शामिल होने से उसका समुद्री क्षेत्र बढ़ गया है।
भारत के लिए क्या है चागोस द्वीप का महत्व?
चागोस द्वीप समूह के मिलने से मॉरीशस का समुद्री क्षेत्र काफी बढ़ जाएगा। अभी मॉरीशस का EEZ लगभग 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। लेकिन मॉरीशस के पास एक छोटा तटरक्षक बल है, जिसमें एक दर्जन से भी कम गश्ती नौकाएं हैं। भारत और मॉरीशस ने मॉरीशस के EEZ में भारत द्वारा जल सर्वेक्षण (hydrographic surveys) के समर्थन के लिए एक समझौते का नवीनीकरण किया है।
- मॉरीशस चागोस द्वीप समूह तक पहुंचने के लिए एक भारतीय जहाज का उपयोग करेगा और वहां अपना झंडा फहराएगा।
- इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत अधिक है। यह ब्रिटेन को एक अप्रत्यक्ष संदेश है, जिसने पहले मॉरीशस को चागोस पहुंचने के लिए एक जहाज की पेशकश की थी।
- भारत ने ऐतिहासिक रूप से मॉरीशस के उपनिवेशवाद से मुक्ति के प्रयासों का समर्थन किया है।
- भारत के मॉरीशस के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं। भारत चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र की निगरानी में भी मदद करेगा।
- विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत को इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते हितों पर नजर रखने में मदद मिलेगी, साथ ही दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में ब्रिटेन की उपस्थिति पर भी नजर रखी जा सकेगी। भारत पोर्ट लुई के पुनर्विकास में भी सहायता करेगा।
चागोस द्वीप का इतिहास
ऐतिहासिक रूप से, चागोस द्वीप समूह मॉरीशस का हिस्सा थे। लेकिन मॉरीशस को ब्रिटेन से आजादी मिलने से ठीक तीन साल पहले, 1965 में, लंदन ने इस द्वीपसमूह को अलग कर दिया था। ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया, जो इन द्वीपों में सबसे बड़ा है, को अमेरिका को एक संयुक्त ब्रिटेन-अमेरिकी सैन्य अड्डे के लिए लीज पर दे दिया था। 2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाया कि द्वीपों पर ब्रिटेन का नियंत्रण अवैध था और द्वीपसमूह को मॉरीशस को वापस कर दिया जाना चाहिए। ब्रिटेन ने अक्टूबर 2024 में चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को वापस करने पर सहमति व्यक्त की थी।
ट्रंप की यह टिप्पणी, जो ब्रिटेन के फैसले को ‘बहुत बड़ी मूर्खता’ बताती है, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। भारत हमेशा से मॉरीशस के चागोस द्वीप समूह पर संप्रभुता के दावे का समर्थन करता रहा है। यह स्थिति भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया मोड़ ला सकती है।
- यह समझना महत्वपूर्ण है कि चागोस द्वीप समूह का रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है। डिएगो गार्सिया में स्थित सैन्य अड्डा हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के लिए एक महत्वपूर्ण उपस्थिति है। इस क्षेत्र में किसी भी बदलाव का भू-राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।
- भारत का मॉरीशस के साथ सहयोग केवल सैन्य या निगरानी तक ही सीमित नहीं है। भारत मॉरीशस के आर्थिक विकास में भी योगदान दे रहा है, जैसे कि पोर्ट लुई के पुनर्विकास में मदद करना। यह दर्शाता है कि भारत मॉरीशस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के मुद्दों को भी उठाता है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का फैसला ब्रिटेन के नियंत्रण को अवैध बताता है, जो मॉरीशस के दावे को मजबूत करता है। ब्रिटेन का इस फैसले को स्वीकार करना और द्वीप समूह को वापस करने पर सहमत होना, अंतरराष्ट्रीय न्याय की जीत के रूप में देखा जा सकता है।
- हालांकि, ट्रंप की टिप्पणी इस प्रक्रिया में एक अप्रत्याशित मोड़ लाती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों और चागोस द्वीप समूह के भविष्य को कैसे प्रभावित करता है।













