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  • ट्रंप की नोबेल पुरस्कार वाली तेल मालिश नहीं आई काम, US ने किया वीजा बैन, मुनीर पर बरसे पाकिस्तानी

    इस्लामाबाद: भारत के साथ पिछले साल मई महीने के संघर्ष के बाद पाकिस्तानियों ने डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तेल मालिश की। पाकिस्तान ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को स्वीकार किया और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी किया। ट्रंप ने कई बार पाकिस्तान के आर्मी चीफ की सार्वजनिक मंचों से तारीफ भी की,


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    By Azad Hind Desk जनवरी 16, 2026
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    इस्लामाबाद: भारत के साथ पिछले साल मई महीने के संघर्ष के बाद पाकिस्तानियों ने डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तेल मालिश की। पाकिस्तान ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को स्वीकार किया और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी किया। ट्रंप ने कई बार पाकिस्तान के आर्मी चीफ की सार्वजनिक मंचों से तारीफ भी की, लेकिन फिर नये साल के पहले महीने में ही पाकिस्तान को उन 75 देशों की लिस्ट में डाल दिया, जिनपर बैन लगाया गया है। सबसे खास बात ये है कि जिस दिन अमेरिका ने पाकिस्तान को वीजा बैन वाले देशों की लिस्ट में डाला, उसी समय असीम मुनीर और पाकिस्तान के डीजी ISI ने क्रिप्टो माइनिंग को लेकर ट्रंप की वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ एक डील साइन की। इसीलिए पाकिस्तानी अब कह रहे हैं कि असीम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप को निजी फायदे दे रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान को लेकर ट्रंप का नजरिया नहीं बदला है।

    पाकिस्तानियों ने अब पूछना शुरू कर दिया है कि “डोनाल्ड ट्रंप की इतनी खुशामद करने का क्या फायदा हुआ?” पाकिस्तान के लिए शर्मनाक स्थिति और खराब तब हुई जब वीजा बैन लगने की अगली सुबह पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने X पर लिखा, कि पाकिस्तान की पासपोर्ट रैंकिंग 126वें से बढ़कर 98वें स्थान पर आ गई है और “यह सिलसिला जारी रहेगा”। लेकिन उनके इस दावे की जियो न्यूज के पत्रकार बेनजीर शाह ने सिर्फ 2 मिनट में ही हवा निकाल दी। उन्होंने कहा कि सरकार गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उनके अलावा जाने-माने एनालिस्ट हुसैन हक्कानी जैसे दूसरे लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी है।

    अमेरिका ने पाकिस्तान को किया बेइज्जत
    हक्कानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “पाकिस्तान का पासपोर्ट अभी भी दुनिया के सबसे खराब पासपोर्ट में से एक है। रैंकिंग में सुधार सिर्फ इसलिए हुआ है क्योंकि पहले के मुकाबले ज्यादा देशों ने कुछ रैंक पर बराबरी की है। 2026 में, यह 31 वीजा-फ्री देशों के साथ 98वें स्थान पर है। 2025 में, यह 33 वीजा-फ्री देशों के साथ 103वें स्थान पर था। दोनों बार 5वां सबसे खराब।” पाकिस्तान पर वीजा बैन लगने के बाद पाकिस्तानियों ने अब पूछना शुरू कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने से क्या हासिल हुआ। पाकिस्तान के एक सोशल मीडिया यूजर फैजान ने लिखा कि “इतनी चापलूसी और नोबेल प्राइज के लिए नॉमिनेट करने के बाद भी हम बैन वीजा लिस्ट में आ गए, हाहाहाहा।”

    वहीं, एक और यूजर ने पिछले साल मिस्र के शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और डोनाल्ड ट्रंप की एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा कि “ट्रंप ने हमारे ही वीजा फ्रीज कर दिए”। वहीं एक और यूजर ने सवाल उठाते हुए पूछा कि “पाकिस्तान US वीजा बैन की लिस्ट में है लेकिन भारत नहीं। तेरा क्या फायदा हुआ असीम मुनीर?” इनमें सबसे मजेदार वाकया तब हुआ, जब एक पाकिस्तानी यूजर ने देश के सूचना और प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तारार का एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि “जब पाकिस्तानी लोग इमिग्रेशन काउंटर पर अपना पासपोर्ट दिखाते हैं, तो जवाब मिलता है कि पाकिस्तान मजबूत है।” उन्होंने लिखा कि “हम कुछ ज्यादा ही मजबूत हो गये।”

    अमेरिका ने वीजा बैन लिस्ट में क्यों डाला? क्या सोच रहे पाकिस्तानी?
    पाकिस्तान के टेक एनालिस्ट हुसैन नदीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि “पाकिस्तान इस लिस्ट में ज्यादा समय तक नहीं रहेगा, इस फैसले पर शायद फिर से विचार किया जाएगा। लेकिन यह बात कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को वीजा फ्रीज लिस्ट में डाला, यह आपको दो बातें साफ-साफ बताती हैं। पहली बात ये कि अमेरिकी विदेश नीति की सोच में पाकिस्तान की क्या जगह है, उसे कुछ सबसे ज्यादा परेशान देशों और अमेरिका के दुश्मनों के साथ रखा गया है। दूसरी बात ये कि यह आपको बताता है कि पाकिस्तान में मिलिट्री शासन कितना नासमझ और बेताब है कि वह ट्रंप की ‘पीठ थपथपाने’ और ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ वाली टिप्पणियों को किसी रणनीतिक जीत या रिश्तों को गहरा करने के संकेत के तौर पर समझ रहा है।”

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