इनमें जर्मनी भी शामिल है। 2024 में अमेरिका जर्मनी का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना था। इस दौरान दोनों देशों के बीच करीब 270 अरब डॉलर का ट्रेड हुआ था। लेकिन 2025 में चीन ने बाजी मार ली और जर्मनी का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया। जर्मनी के फेडरल स्टेटिस्टिकल ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक चीन और जर्मनी के बीच 2025 में 251 अरब यूरो का ट्रेड हुआ जो 2024 के मुकाबले 2.2 फीसदी अधिक है। इस दौरान अमेरिका और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 240 अरब यूरो रहा जो पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी कम है। इसमें टैरिफ की सबसे बड़ी भूमिका है।
अमेरिका ने भारत के साथ खेला ‘डर्टी गेम’, सोलर इंपोर्ट पर लगाया 126% टैक्स, बौखलाए हुए हैं ट्रंप
भारत-चीन ट्रेड
पिछले साल जर्मनी ने चीन से 170.6 अरब यूरो का सामान आयात किया। इस दौरान जर्मनी से चीन को निर्यात 81.3 अरब यूरो रहा। यानी इसमें चीन ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है। हालांकि जर्मनी के लिए चीन उसका सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है लेकिन चीन के लिए जर्मनी आठवां बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। चीन का ट्रेड सरप्लस पिछले साल पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। इस दौरान अमेरिका चीन का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर रहा। दोनों देशों के बीच 560 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।
उसके बाद हॉन्ग कॉन्ग (367 अरब डॉलर), साउथ कोरिया ($331 अरब), जापान ($322 अरब), ताइवान ($314 अरब), वियतनाम ($296 अरब), रूस ($228 अरब), जर्मनी ($211 अरब), ऑस्ट्रेलिया ($207 अरब) और मलेशिया ($192 अरब) का नंबर रहा। इंडोनेशिया इस लिस्ट में 11वें नंबर पर रहा। चीन और इंडोनेशिया के बीच पिछले साल द्विपक्षीय व्यापार 167 अरब डॉलर रहा। भारत इस लिस्ट में 12वें नंबर पर है। भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 156 अरब डॉलर रहा। चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। इस दौरान भारत का चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट रेकॉर्ड 116 अरब डॉलर पहुंच गया।













