अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 की मेजॉरिटी से डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी कहा लेकिन इससे इकट्ठा रकम पर कोई आदेश नहीं दिया। सवाल उठता है कि अरबों की रुपए की रकम क्या भारत समेत उन देशों को लौटाई जाएगी, जिनसे टैरिफ के नाम पर यह हासिल की गई है। कोर्ट ने यह नहीं बताया है कि ट्रंप के टैरिफ से इकट्ठा का क्या किया जाए।
अमेरिका ने 134 अरब किए हैं जमा
बीते साल 14 दिसंबर तक अमेरिका की फेडरल सरकार ने 3,01,000 से ज्यादा अलग-अलग इंपोर्टर्स से टैरिफ को चुनौती देकर 134 अरब का रेवेन्यू इकट्ठा किया है। यह जानकारी यूनाइटेड स्टेट कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन डेटा और एजेंसी की ओर से US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में जमा की गई फाइलिंग से मिली है।
जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने कहा कि कोर्ट ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि सरकार को इंपोर्टर्स से इकट्ठा किए अरबों डॉलर वापस करने चाहिए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 134 अरब की रकम पर कोई निर्देश नहीं दिया है। माना जा रहा है कि इस सवाल को निचली अदालतों को सुलझाना होगा। कैवनॉ ने माना कि रिफंड में गड़बड़ी की संभावना है।
क्या अमेरिका रीपेमेंट करेगा?
टैरिफ से जमा रकम के रिफंड का मुद्दा इस पूरे मामले में छाया हुआ है। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारियों का कहना है कि संभावित रीपेमेंट के अमेरिकी इकोनॉमी पर खतरनाक नतीजे हो सकते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका की ओर से दुनियाभर के देशों को पैसा लौटाए जाने की बात कहना फिलहाल जल्दीबाजी होगी।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप के बीते साल लागू किए गए ग्लोबल टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इसके लिए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया। उनका यह तरीका ठीक नहीं था। टैरिफ लगाने का अधिकार उनके नहीं बल्कि अमेरिकी संसद के पास है।














