बीबीएल में आ रहा नया नीयम
यह नियम इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम जैसा है, लेकिन यह टीमों के लिए जरूरी नहीं है। टीमें चाहें तो इस नियम को न अपनाकर पारंपरिक प्लेइंग इलेवन के साथ खेल सकती हैं। इससे पहले, BBL ने ‘पावर सर्ज’ और ‘X-फैक्टर रूल’ जैसे नियम भी आजमाए हैं। ‘X-फैक्टर रूल’ को 2021-22 सीजन के बाद इसलिए बंद कर दिया गया था क्योंकि इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो रहा था।
यह नया ‘डेजिग्नेटेड बैटर और फील्डर रूल’ क्रिकेट के रोमांच को बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है। इस नियम के तहत, टॉस के समय ही टीमें यह तय कर सकेंगी कि कौन सा खिलाड़ी सिर्फ बल्लेबाजी करेगा और कौन सा सिर्फ फील्डिंग। अगर कोई टीम ‘डेजिग्नेटेड बैटर’ चुनती है, तो वह खिलाड़ी सिर्फ बल्ले से कमाल दिखाएगा। वह गेंदबाजी नहीं कर पाएगा और न ही फील्डिंग में हिस्सा लेगा। इसके साथ ही, उस टीम को एक ‘डेजिग्नेटेड फील्डर’ भी चुनना होगा। यह खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर फील्डिंग करेगा और विकेटकीपिंग भी कर सकता है, लेकिन गेंदबाजी की जिम्मेदारी उस पर नहीं होगी।
BBL का यह नया नियम वैकल्पिक है। टीमें अपनी मर्जी से इस नियम को अपना सकती हैं या नहीं। अगर कोई टीम इस नियम को नहीं चुनती है, तो वे अपनी सामान्य प्लेइंग इलेवन के साथ खेलेंगी जिसमें सभी खिलाड़ी अपनी-अपनी भूमिका निभाएंगे।
बीबीएल में पहले भी आजमाए गए नियम
BBL ने पहले भी कई नए नियम आजमाए हैं। ‘पावर सर्ज’ नियम काफी सफल रहा। वहीं, ‘X-फैक्टर रूल’ को 2020 से 2022 तक आजमाया गया था। इस नियम के तहत, टीमें अपनी प्लेइंग इलेवन के साथ दो सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी भी चुन सकती थीं। इनमें से एक सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी पहली पारी के 10 ओवर के बाद मैदान पर आ सकता था, बशर्ते कि मूल खिलाड़ी ने बल्लेबाजी न की हो या एक ओवर से कम गेंदबाजी की हो। हालांकि, इस नियम का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुआ और इसे 2021-22 सीजन के बाद बंद कर दिया गया। अब देखना यह है कि ‘डेजिग्नेटेड बैटर और फील्डर रूल’ कितना सफल होता है।













