हामिद मीर ने ट्रंप प्रशासन के पाकिस्तान को वीजा फ्रीज लिस्ट में डालने पर ना सिर्फ शहबाज शरीफ बल्कि मुनीर की मिलिट्री लीडरशिप पर भी सवाल उठाया है। मीर ने कहा कि मुनीर और शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी में कोई कमी नहीं छोड़ी। दुनियाभर में जाकर उनकी तारीफ की लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को उसकी हकीकत बता दी है।
ट्रंप की चापलूसी से क्या मिला
मीर ने कहा कि शहबाज शरीफ और असीम मुनीर ने 2025 में डोनाल्ड ट्रंप को दो बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने की बात कही। पाकिस्तान और भारत के सीजफायर का श्रेय उनको दिया। इसका मजा हमें यह मिला है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग पर अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी है।
हामिद मीर ने अपने बयान में आगे कहा, ‘भारत ने कभी डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट नहीं किया। सीजफायर पर भी उनके दावे का समर्थन नहीं किया। नई दिल्ली की कई अमेरिकी नीतियों पर सैद्धांतिक दूरी के बावजूद भारत को बैन से बाहर रखा गया है, जबकि पाकिस्तान लिस्ट में सबसे ऊपर है।’
पाकिस्तान की नाकामयाबी
मीर ने कहा कि अमेरिका का कदम सिर्फ रूटीन पॉलिसी बदलाव नहीं है बल्कि एक बड़ा डिप्लोमैटिक अपमान है। पाकिस्तान को हाई-रिस्क देश के तौर पर कैटेगरी में डालने पर शरीफ को जवाब देना चाहिए। ट्रंप प्रशासन का फैसला दिखाता है कि वहां हमारे नागरिकों को US वेलफेयर सिस्टम पर संभावित बोझ माना जाता है।
ट्रंप प्रशासन ने 75 देशों के नागरिकों के लिए ‘इमिग्रेंट वीजा’ की प्रोसेसिंग पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है। यह रोक 21 जनवरी से प्रभावी होगी। सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल शामिल हैं लेकिन भारत इससे बाहर है। ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के लिए आवेदन करने वाले भारतीय नागरिकों पर इस निलंबन का सीधा असर नहीं पड़ेगा।












