सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि ट्रंप ने नेशनल इमरजेंसी के लिए रखे गए कानून का इस्तेमाल करके बड़े टैरिफ लगाकर अपने अधिकार का उल्लंघन किया है। ऐसे में इन टैरिफ को रद्द किया जाता है। अदालत ने माना कि दुनियाभर से अमेरिका आने वाले प्रोडक्ट पर टैरिफ लगाने का ट्रंप का तरीका 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) नाम के कानून के तहत नहीं है।
ट्रंप ने इमरजेंसी पावर का किया था इस्तेमाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल दूसरे देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर टैक्स लगाने का एलान किया था। डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए अमेरिकी संसद से मंजूरी लेते हुए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को संसद को दरकिनार कर इमरजेंसी आदेश करने का अधिकार देता है।
डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ लगाने के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। बीते साल अगस्त में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के कदम को गैरकानूनी करार दे दिया था लेकिन अदालत ने टैरिफ को लागू रहने दिया था। इसके बाद वाइट हाउस की ओर से अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को झटका देते हुए टैरिफ को गलत बताया है।
ससंद को बायपास नहीं कर सकते
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘टैरिफ लगाने का अधिकार संसद के पास है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह से संसद को बायपास किया, वह ठीक तरीका नहीं है। इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता है। अदालत को लगता है कि ट्रंप का टैरिफ पर फैसला कानून सम्मत नहीं था।’
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा गया था कि टैरिफ के खिलाफ फैसला देश का भारी नुकसान करेगा। कोर्ट ने ट्रंप के वकीलों की दलील को नहीं माना और टैरिफ रद्द करने का फैसला सुनाया। ट्रंप ने बीते साल कई देशों पर टैरिफ लगाने के लिए अपने इस अधिकार का इस्तेमाल किया था।














