न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अली खामेनेई के खिलाफ उतरे प्रदर्शनकारियों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी से उम्मीद मिली। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब यह उम्मीद गुस्से और निराशा में बदल गई है। कई लोगों का कहना है कि ट्रंप ने अपने बयानों से उन्हें गुमराह किया गया और फिर रास्ते में छोड़ दिया।
सेना के रास्ते में होने का झूठ बोला गया
प्रदर्शनकारियों ने याद किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यहां तक कहा कि तेगरान के लिए मदद आ रही है। उन्होंने पोस्ट किया कि प्रदर्शनकारियों को नुकसान होने पर अमेरिका तैयार है। इससे ईरानियों को लगा कि ट्रंप गंभीर और सच में उनकी ओर से कोई मदद जल्दी ही आ जाएगी। ये शायद सैन्य दखल भी हो सकती है। हालांकि अब पता चल रहा है कि वह सब झूठ था।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विरोध शुरू होने के बाद खबर आई कि पेंटागन ने क्षेत्र में एक बड़े अमेरिकी बेस से गैर जरूरी कर्मचारियों को वापस बुलाया है। इसे व्यापक रूप से संघर्ष की तैयारी के रूप में पढ़ा गया। इससे प्रदर्शनकारी सीधे पुलिस और सुरक्षाबलों से भिड़ गए। इसमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौत हुई।
ट्रंप के भरोसे जान जोखिम में डाली
डोनाल्ड ट्रंप ने विरोध प्रदर्शन में भारी हिंसा के बाद बीते दिनों अपने रुख में बदलाव दिखाया। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन ने उन्हें हत्याएं और फांसियां बंद होने का भरोसा दिया है। ऐसे में अमेरिका सैन्य कार्रवाई के प्लान को टाल रहा है। ट्रंप का यह रुख उन प्रदर्शनकारियों के लिए झटका है, जिन्होंने अमेरिकी हस्तक्षेप के भरोसे अपनी जान जोखिम में डाली।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों से हम निराश भी हैं और गुस्से में भी हैं। हमें ऐसा महसूस हो रहा है कि ट्रंप ने हमें तोप के चारे के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने भरोसा दिलाकर हमें एक ऐसे शासन के सामने लड़ने उतार दिया, जो अपने विरोधियों को छोड़ने के लिए नहीं जाना जाता है।














