कस्मीर, पाकिस्तान और बुरहान के नारे
स्पेशल सीपी प्रमोद सिंह कुशवाह ने बताया कि दरअसल 8 फरवरी को CISF की तरफ से सुप्रीम कोर्ट मेट्रो थाने को कंप्लेंट दी कि जनपथ मेट्रो स्टेशन पर प्रो-पाक और प्रो-टेरर पोस्टर लगाए हैं। जांच में कश्मीरी गेट मेट्रो के पिलर और कुछ अन्य हिस्सों में ऐसे ही पोस्टर लगे मिले। पोस्टरों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी बुरहान वानी और दूसरों को आइडियल दिखाने वाली तस्वीरें थीं। एक पोस्टर पर ‘इंडिया स्टॉप जेनोसाइड एंड फ्री कश्मीर’ लिखा था। साथ ही ‘हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है’ और ‘कश्मीरी एकkजुटता दिवस’ जैसे नारे भी लिखे थे।
भारत में लश्कर के ऑपरेशन का लीड
15 फरवरी को कोलकाता मॉड्यूल के ठिकाने पर रेड कर दो आरोपियों उमर और रोबिडल को अरेस्ट किया गया। इनकी निशानदेही पर तमिलनाडु से छह संदिग्ध अरेस्ट किए गए। पूछताछ में उमर ने बताया कि वह मार्च 2025 में हैंडलर शब्बीर के संपर्क में आया। उसने उसे भारत में लश्कर के ऑपरेशन को लीड करने के लिए अपॉइंट किया था। शब्बीर का प्लान भारत में आतंकी हमले करने के लिए भारतीय पहचान वाले बांग्लादेशी लोगों का इस्तेमाल करना था।
पोस्टर चिपकाने के वीडियो बनाकर भेजे
शब्बीर के कहने पर 6 फरवरी को उमर और रोबिडल ने कोलकाता से पटना होते हुए दिल्ली के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट ली। 7 फरवरी की रात में इन्होंने दिल्ली में 10 अलग-अलग जगहों पर पोस्टर चिपकाए और 8 फरवरी को ट्रेन से कोलकाता के लिए निकल गए। इन्होंने पोस्टर चिपकाने के विडियो भी बनाए और शब्बीर अहमद लोन को भेजे।
9 दिन गुपचुप चलता रहा ऑपरेशन
पुलिस की पूछताछ में दोनों ने कबूल लिया किया कि इन लोगों ने बांग्लादेश में बैठे लश्कर के हैडलर शब्बीर अहमद लोन के इशारे पर पोस्टर लगाए थे। उमर ने बताया कि एक और बांग्लादेशी हैंडलर सैद-उल-इस्लाम ने उमर फारूक को 6 बांग्लादेशियों से संपर्क कराया। यह सभी तमिलनाडु में मौजूद थे। सैद-उल-इस्लाम के कहने पर ये तमिलनाडु से कोलकाता पहुंचने वाले थे। इससे पहले सेल की टीम ने तमिलनाडु पहुंचकर लोकल पुलिस की मदद से इनको दबोच लिया। पुलिस का कहना है कि यह ऑपरेशन करीब 9 दिन गुपचुप तरीके से चलता रहा था।













