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  • दीपू दास की जान की कीमत नहीं लगा सकते, बांग्लादेश में मॉब लिंचिग के शिकार हिंदू युवक के परिवार ने ठुकराया 50 लाख मुआवजा

    ढाका: बांग्लादेश में भीड़ की हिंसा का शिकार हुए फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास के परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद लेने से इनकार किया है। परिवार ने कहा है कि उनको पैसा नहीं न्याय चाहिए। परिवार ने कहा कि कोई भी दौलत दीपू की जिंदगी का बदल नहीं हो सकती है। बांग्लादेश सरकार की


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    By Azad Hind Desk फरवरी 12, 2026
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    ढाका: बांग्लादेश में भीड़ की हिंसा का शिकार हुए फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास के परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद लेने से इनकार किया है। परिवार ने कहा है कि उनको पैसा नहीं न्याय चाहिए। परिवार ने कहा कि कोई भी दौलत दीपू की जिंदगी का बदल नहीं हो सकती है। बांग्लादेश सरकार की ओर 50 लाख टका (बांग्लादेशी करेंसी) मुआवजे की घोषणा के बाद परिवार ने यह प्रतिक्रिया आई है। मुआवजे का ऐलान और परिवार का जवाब ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश में आम चुनाव हो रहा है।

    दीपू चंद्र दास को बीते साल 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले के भालुका में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ ने दीपू पर इस्लाम का आरोप लगाते हुए उसकी हत्या की थी। भीड़ ने दीपू के शव को आग तक लगा दी थी। इस घटना की दुनियाभर में चर्चा हुई थी और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में आ गया था।

    दीपू के परिवार के लिए आर्थिक मदद और घर का ऐलान

    बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने दीपू के परिवार को 50 लाख टका मुआवजा देने का ऐलान किया है। मंगलवार को सरकार ने दीपू के परिवार के लिए 25 लाख टके की हाउसिंग मदद और नेशनल हाउसिंग अथॉरिटी को घर बनाने का आदेश दिया है।

    अधिकारियों ने कहा है कि दीपू के पिता और पत्नी को 10-10 लाख टका दिए जाएंगे। दीपू के बच्चे के नाम पर 500,000 टके की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद खोली जाएगी। अफसरों का कहना है कि सभी पैसा नकद ना देकर इस तरह के बांटने का मकसद परिवार के भविष्य को सुरक्षिक करना है।

    दीपू की जान की कीमत कोई नहीं दे सकता है

    सरकार के मुआवजे के ऐलान के बाद बुधवार को दीपू के पिता रबी चंद्र दास ने कहा, ’50 लाख टका छोड़िए, सारी दुनिया का पैसा भी मेरे बेटे की जान के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता है। हम चाहते हैं कि मेरे बेटे के कातिलों को सजा मिले। इस तरह से ट्रायल हो कि देश के कानून में यह एक मिसाल बने।

    रबी चंद्र ने आगे कहा, ‘दीपू हमारे परिवार का अकेला कमाने वाला था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि उसे इस बेरहमी से मार दिया जाएगा। उसका जुर्म क्या था। अगर उसने किसी धर्म की बेइज्जती की भी थी तो देश का कानून उसे सजा देता। हम शायद अपने बेटे को इसलिए नहीं बचा सके क्योंकि हम गरीब हैं।’

    दीपू की हत्या में 22 गिरफ्तार

    मैमनसिंह के एडिशनल पुलिस सुपरिटेंडेंट मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामून ने बताया है कि दीपू दास की हत्या के केस में अब तक 22 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। दीपू के छोटे भाई अपू दास ने 19 दिसंबर को इस संबंध में केस दर्ज कराया था, जिसके आधार पर पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है।

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