सेना के गुप्त नेटवर्क पर तैनात OpenAI का दिमाग
X पर सैम ऑल्टमैन ने दुनिया खो खतरनाक और डरावनी जगह बताते हुए, उनके AI मॉडल को सेना के प्राइवेट नेटवर्क पर तैनात करने की बात को स्वीकारा है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि रक्षा मंत्रालय ने बातचीत के दौरान सुरक्षा को लेकर गरहा सम्मान जताया। यही वजह है कि ये मॉडल क्लाउड नेटवर्क पर ही तैनात होंगे और इसके लिए खास सेफगार्ड या कहें कि सुरक्षा कवच भी बनाए जाएंगे।
ऑल्टमैन ने अपने ऐलान के साथ बाकी AI कंपनियों को भी सलाह दी कि वे सरकार के साथ इसी तरह की शर्तों पर काम करें।
युद्ध में होगा AI का इस्तेमाल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक,(REF.) इस डील के साथ वह चर्चा फिर तेज हो गई है कि क्या अब AI का इस्तेमाल युद्ध में होगा या युद्ध में फैसले AI के जरिए लिए जाएंगे। इस पर सैम ऑल्टमैन ने अपनी बात रखी है। दरअसल ऑल्टमैन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनके दो सबसे बड़े सिद्धांत हैं। पहला घरेलू मास सर्विलांस यानी कि आम लोगों की जासूसी और दूसरा ऑटोमैटिक हथियारों यानी कि बिना इंसान के चलने वाले हथियारों पर पूरी तरह से पाबंदी हो। सैम ऑल्टमैन ने इसे समझौते का हिस्सा भी बनाया है। उनका कहना है कि रक्षा मंत्रालय इन दोनों सिद्धांतों को समझौते का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हो गया है।
खतरनाक दुनिया का बहाना?
ऑल्टमैन कई बार कह चुके हैं कि AI के फायदे सभी तक बराबर तरीके से पहुंचा पाना ही उनका मिशन है। इसी वजह से उन्होंने यह डील की है। जहां एंथ्रोपिक जैसी प्रतिद्वंदी कंपनियां सेना द्वारा एआई के हर तरह के इस्तेमाल के दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं ऑल्टमैन ने दावा किया है कि उन्होंने अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया है। आखिर में उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य इस खतरनाक होती दुनिया में मानवता की सबसे बेहतर तरीके से सेवा करना है।













