वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने क्या कहा
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू का दावा है कि उसने यह रैंकिंग आर्थिक क्षमता, सैन्य संसाधन, तकनीकी प्रगति, जनसांख्यिकीय शक्ति, शासन स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रभावी ढंग से भाग लेने की क्षमता के संयोजन से निर्धारित की है। इसमें शामिल देशों को सैन्य गठबंधन, अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन, राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक प्रभाव और नेतृत्व जैसी पांच विशेषताओं पर परखा जाता है। जो देश उच्च रैंक पर होते हैं, वे इन सभी क्षेत्रों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, जिससे विश्व मंच पर उनका पहचान और प्रभाव बढ़ता है।
दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली देश
| क्रम संख्या | देश |
| 1 | अमेरिका |
| 2 | चीन |
| 3 | रूस |
| 4 | यूनाइटेड किंगडम |
| 5 | जर्मनी |
| 6 | दक्षिण कोरिया |
| 7 | फ्रांस |
| 8 | जापान |
| 9 | सऊदी अरब |
| 10 | इजरायल |
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों को चुनना मुश्किल
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों को परिभाषित करना जितना सोचा जाता है, उससे कहीं ज्यादा जटिल प्रक्रिया है। शक्ति कई रूपों में होती है, सैन्य शक्ति से लेकर आर्थिक ताकत, राजनीतिक प्रभाव और सांस्कृतिक प्रभाव तक। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश वैश्विक आर्थिक पैटर्न को आकार देते हैं, एक मजबूत सेना बनाए रखते हैं और ऐसी विदेश नीतियां बनाते हैं जिनके प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस होते हैं।”
सर्वे के आधार पर जारी होती हैं रैंकिंग
इसमें बताया गया है, U.S. News and World Report, BAV Group और पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल के साथ मिलकर, अपनी सालाना बेस्ट कंट्रीज़ रैंकिंग में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की रैंकिंग जारी करता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रैंकिंग को जारी करने के लिए दुनियाभर में सर्वे किया जाता है। इन सर्वे में कुछ निश्चित बिंदुओं पर लोगों से प्रतिक्रियाएं मांगी जाती है।













