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  • दो देशों की भारतीय क्षेत्र पर दावा करने की कोशिश… सीडीएस अनिल चौहान ने कुछ इस अंदाज में चेताया

    नई दिल्ली : चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध के नए डोमेन साइबरस्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और कॉग्निटिव वॉरफेयर हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप पुराने डोमेन को देखें, तो युद्ध हमेशा लंबा और क्रूर होगा… हम यूक्रेन और गाजा में ऐसा होते देख रहे हैं…. लेकिन नए डोमेन में युद्ध


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    By Azad Hind Desk जनवरी 23, 2026
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    नई दिल्ली : चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध के नए डोमेन साइबरस्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और कॉग्निटिव वॉरफेयर हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप पुराने डोमेन को देखें, तो युद्ध हमेशा लंबा और क्रूर होगा… हम यूक्रेन और गाजा में ऐसा होते देख रहे हैं…. लेकिन नए डोमेन में युद्ध तेज और स्मार्ट होगा। जनरल चौहान ने कहा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर में यही देखा, या कुछ हद तक इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में भी… इसलिए भारत जैसे देश के लिए, जिसकी सीमा विवादित है।

    जनरल चौहान ने कहा कि दो देश भारतीय क्षेत्र पर दावा करने की कोशिश कर रहे हैं, पुराने डोमेन में इस लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की संभावना हो सकती है जिसके लिए हमें हमेशा तैयार रहना होगा। सीडीएस जनरल अनिल चौहान शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

    भविष्य की चुनौतियों के लिए बदलाव की जरूरत

    चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भविष्य के खतरों और चुनौतियों के लिए तैयारी के लिए भारतीय सेना जिस तरह से युद्ध के बारे में सोचती है, उसके लिए तैयारी करती है और अपने अधिकारियों और जवानों को तैयार करती है, उसमें सिस्टम-लेवल पर बदलाव की जरूरत है। सीडीएस ने कहा कि इसके लिए वैचारिक या सैद्धांतिक बदलाव, संगठनात्मक और संरचनात्मक बदलाव, सांस्कृतिक तालमेल और प्रक्रियात्मक सुधारों की ज़रूरत होगी, ताकि हम इस तरह के बदलाव के हिसाब से ढल सकें।

    मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी

    जनरल अनिल चौहान ने कहा, जहां तक वैचारिक और सैद्धांतिक बदलावों की बात है, हमने कई जॉइंट डॉक्ट्रिन जारी किए हैं… उनमें से कई अब ओपन डोमेन में उपलब्ध हैं। असल में, हमने कल मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया… ऑपरेशन सिंदूर के बाद, हम एक ऐसे फ्रेमवर्क पर भी विचार कर रहे हैं जो इस बारे में सोचे और विचार करे कि भविष्य में युद्ध कैसे विकसित होगा, जो भविष्य के ऑपरेशंस और एनालिसिस के बढ़ने के साथ हमारे हेडक्वार्टर के विचारों का हिस्सा होगा।

    तकनीकी क्षमता के साथ रणनीतिक सोच का समन्वय

    इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्तता, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सोच का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, आत्मनिर्भर भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय सेना ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत उभरते डिजिटल सूचना परिदृश्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एक प्रणाली विकसित की जाएगी।

    सीडीएस ने कहा कि यह पहल सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से साकार की जाएगी। इस परियोजना में एक स्वदेशी स्टार्टअप इंडी एस्ट्रा की भी भागीदारी होगी। इस पहल के माध्यम से संस्थागत अनुभवों, शैक्षणिक विशेषज्ञताओं और भारतीय उद्योगों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मनिर्भरता व क्षमता विकास को मजबूती देना है। गौरतलब है कि आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण जॉइंटनेस और नवाचार के अनुरूप है। यह पहल भविष्य की चुनौतियों के लिए भारत की रक्षा तैयारियों को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    संरचनात्मक बदलावों पर हो रहा काम

    उन्होंने कहा कि जहां तक संगठनात्मक और संरचनात्मक बदलावों की बात है, तीनों सेवाएं इस दिशा में काम कर रही हैं…. प्रक्रियात्मक बदलावों में खरीद, रखरखाव और उपकरणों का मेंटेनेंस शामिल होगा। जनरल चौहान ने कहा कि हमने पहले ही DPM (डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल) 2025 को रिवाइज कर दिया है, जो आपके रेवेन्यू बजट और रखरखाव का ध्यान रखता है। हम डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 को रिवाइज करने जा रहे हैं।

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