एजेंसी के मुताबिक, DYFI के कार्यकर्ताओं नें विरोध प्रदर्शन के दौरान थिसूर फन मूवीज थिएटर के पास लगे फिल्म के पोस्टरों पर जलता हुआ कोयला फेंक दिया। इस प्रोटेस्ट को थिसूर जिला समिति के सचिव के.एस. रुस्सल राज लीड कर रहे थे। नतीजन सिनेमाघरों के बाहर फिल्म के पोस्टर फाड़े और जलाए गए, जिससे झड़पें हुईं और ऑर्गनाइजर्स को लोगों के टिकट के पैसे लौटाने पड़े।
‘द केरल स्टोरी 2’ की स्क्रीनिंग कैंसिल
फिल्म के विरोध में संगठन ने मार्च निकाला था। फिल्म की कहानी तीन नौजवान लड़कियों पर आधारित है। जिनका उनके बॉयफ्रेंड धर्म परिवर्तन करा देते हैं। अब थिएटर्स में दर्शकों कि कमी के कारण शोज कैंसिल किए गए। थिएटर के मैनेजमेंट ने रिफंड प्रॉसेस शुरू कर दिया है और पुष्टि की है कि अब मॉल के अंदर कोई भी लाइव स्क्रीनिंग नहीं होगी। तिरुवनंतपुरम के मॉल ऑफ त्रावणकोर स्थित सिनेपोलिस में भी ऐसा हुआ है। जहां विरोध प्रदर्शन के बाद फिल्म के शोज कैंसिल कर दिए गए।
‘द केरल स्टोरी 2’ के बारे मे मेकर्स की राय
फिल्ममेकर्स का कहना है कि साल 2023 में आई फिल्म की तरह ये भी सच्ची घटना पर आधारित है। लेकिन कुछ लोग इसे प्रोपेगेंडा फिल्म बता रहे हैं और इसकी रिलीज रोकने की मांग कर रहे हैं। जबकि विपुल शाह ने कहा, ‘न तो हमारी फिल्म, न मैं, न ही मेरी टीम के सदस्य केरल राज्य के खिलाफ हैं। ये जमीन तो भगवान की अपनी है। ये खूबसूरत राज्य है। लेकिन अगर यहां कुछ गलत हो रहा है तो वो चीज बस चीज मैं लोगों के नोटिस में ला रहा हूं।’
रोक हटने पर बोले थे विपुल शाह
फिल्म की रिलीज पर से रोक हटने पर प्रोड्यूसर ने कहा था, ‘अब, हाई कोर्ट के आदेश के बाद आगे चर्चा का कोई मतलब नहीं है। माननीय जजों को CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के काम करने के तरीके में कोई कमी नहीं मिली। मैं एक बात साफ करना चाहता हूं। आम तौर पर किसी फिल्म की सेंसर स्क्रीनिंग में पांच लोगों की कमिटी होती है। हालांकि, इस फिल्म के लिए, केरल के दो सोशल वर्कर्स समेत आठ लोग थे, ताकि यह पक्का किया जा सके कि राज्य से जुड़ी कोई गलत जानकारी न हो।’











