हेमा मालिनी और रमेश सिप्पी ‘शोले’ के 50 साल पूरे होने पर पत्रिका के कवर लॉन्च प्रोग्राम में शामिल हुए थे। रमेश सिप्पी ने IANS से कहा, ‘एक दिन धर्मेंद्र ने फैसला किया कि वो होटल से शूटिंग लोकेशन तक पैदल जाएंगे, जो करीब 50 किलोमीटर दूर था। उन्होंने सुबह करीब दो या तीन बजे चलना शुरू किया। बीच-बीच में थोड़ी देर रुके और फिर चलते-चलते सुबह करीब 7 बजे शूटिंग लोकेशन पर पहुंचे। एक घंटे आराम करने के बाद वो बाहर आए और शूटिंग के लिए तैयार थे। ये बहुत ही हैरान कर देने वाला था, लेकिन वो ये काम करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ थे।’ इसी के आगे हेमा मालिनी ने जोड़ा, ‘वो मीलों पैदल चलते थे।’
नारियल पानी में वोडका मिलाते थे धर्मेंद्र
इसके बाद रमेश सिप्पी ने आगे कहा, ‘धर्मेंद्र का ये एक पहलू था। दूसरा पहलू उनका चंचल स्वभाव था। कभी-कभी नारियल पानी में थोड़ी सी वोडका मिलाकर, एक छोटी सी आंख मारकर, वो बात समझ जाते थे।’ उन्हें इससे खास तरह का हौसला मिलता था।
धर्मेंद्र में था बचकाना भोलापन था
वो आगे कहते हैं, ‘उनमें एक बचकाना भोलापन था, जो अक्सर दिख जाता था। कुछ ही पलों में वे एक मजबूत और गंभीर इंसान में बदल जाते थे। ये खूबी बहुत आकर्षक थी। उन्हें गुस्सा आ सकता था, लेकिन वो कुछ ही देर में ठीक हो जाते थे।
1975 में रिलीज हुई थी ‘शोले’
‘शोले’ साल 1975 में रिलीज हुई थी। इस ऐतिहासिक फिल्म में धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार निभाया था। ये एक कल्ट क्लासिक बन गई और हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाने लगी। इसमें अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, हेमा मालिनी, संजीव कुमार, अमजद खान, एके हंगल, सचिन पिलगांवकर थे।













