दूसरे विश्व युद्ध में हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराने का आदेश देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने कहा था कि जापानियों ने पर्ल हार्बर पर हमला कर यह लड़ाई शुरू की है और इसी बात की कीमत वे चुका रहे। तब से अभी तक-जब-जब परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव बढ़ा है, यह डर भी दुनिया को रहा कि कहीं हिरोशिमा और नागासाकी जैसी त्रासदी फिर न देखने को मिले। शीत युद्ध के दौरान तो एक से अधिक मौके आए, जब लगने लगा था कि अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच परमाणु युद्ध होने ही वाला है। और 1983 में ऐसी नौबत भी आई थी एक बार, जब ब्रिटिश सरकार ने स्पीच भी तैयार कर ली कि अगर परमाणु युद्ध छिड़ा तो जनता से क्या कहना है।
रानी करतीं संबोधित: यह स्पीच क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के लिए तैयार कराई गई थी। गनीमत रही कि रानी को कभी उन शब्दों को कहने की जरूरत नहीं पड़ी। ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव्स ने साल 2013 में इस भाषण को सार्वजनिक किया। इस पर तारीख है 4 मार्च, 1983। इसमें क्वीन एलिजाबेथ को बात शुरू करनी थी क्रिसमस से कि कुछ महीने पहले कैसे पूरे देश ने एक त्योहार मनाया और अब युद्ध की त्रासदी की ओर बढ़ रहा है।
स्पीच के शब्द: ‘युद्ध का यह पागलपन एक बार फिर दुनियाभर में फैल रहा है। हमारे बहादुर देश को फिर से बड़ी बाधाओं से बचने के लिए खुद को तैयार करना होगा। मैं दुख और गर्व का वह पल कभी नहीं भूल सकती। साल 1939 में मैं और मेरी बहन वायरलेस सेट पर पिता के प्रेरक शब्दों को सुन रहे थे। एक क्षण के लिए भी मैंने नहीं सोचा था कि यह जिम्मेदारी कभी मेरे ऊपर आएगी। हम सभी जानते हैं कि आज हमारे सामने जो खतरे हैं, वे हमारे लंबे इतिहास में किसी भी समय की तुलना में कहीं अधिक बड़े हैं। दुश्मन कोई सैनिक नहीं है, जिसके कंधे पर राइफल हो और न ही हमारे शहरों-कस्बों के ऊपर उड़ानें भरने वाला कोई एयरमैन है। दुश्मन है दुरुपयोग की गई तकनीक की घातक शक्ति।’
भावनात्मक अपील: इस भाषण में क्वीन एलिजाबेथ के पिता जॉर्ज पंचम का जिक्र आता है, जो दूसरे विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश साम्राज्य के राजा थे। जनता की भावनाओं के साथ जुड़ने के लिए रॉयल नेवी यूनिट में हेलिकॉप्टर पायलट क्वीन के बेटे एंड्रयू का भी जिक्र आया। ‘मेरा प्यारा बेटा एंड्रयू इस वक्त अपनी यूनिट के साथ तैनात है। हम उसकी और दूसरे सभी लोगों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रार्थना कर रहे हैं। परिवार का बंधन ही इस अज्ञात खतरे के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा होनी चाहिए। अगर परिवार मिलजुल कर रहेंगे, साहसी होंगे और उन लोगों को आश्रय देंगे जो अकेले और असुरक्षित हैं, तो हमारे देश की जीवित रहने की इच्छाशक्ति को तोड़ा नहीं जा सकता।’
नकली सेना से लड़ाई: परमाणु युद्ध के हालात से निपटने के लिए एक युद्ध अभ्यास भी किया गया था। एक तरफ थी सोवियत संघ व उसके दोस्तों की ऑरेंज फोर्स और उनका सामना करने के लिए खड़ी नैटो की ब्लू फोर्स। ऑरेंज सेना ब्रिटेन पर घातक रासायनिक हथियारों से हमला करती है। ब्लू फोर्स जवाब में सीमित क्षमता वाले परमाणु हथियार इस्तेमाल करती है, ताकि दुश्मन को शांति के लिए मजबूर किया जा सके। उस स्पीच की तरह इस वॉर एक्सरसाइज की सीख को भी आजमाने की जरूरत नहीं पड़ी। ब्रिटिश अफसरों का अंदाजा था कि क्वीन ने अपने उस भाषण को शायद देखा भी नहीं था।














