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  • पाकिस्तान-चीन, अमेरिका की नीयत में खोट…अफगानिस्तान का ‘चिकननेक’ और बगराम हथियाएंगे? भारत के लिए चौतरफा खतरा

    नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भीषण जंग शुरू हो गई है। पाकिस्तानी फौज ने जोरदार हमला बोल दिया है। पाकिस्तान ने गजब लिक हक नाम का एक ऑपरेशन चलाया है। वहीं, तालिबान ने इस्लामाबाद पर ड्रोन हमला करके पाकिस्तान की हवा खराब कर दी है। मगर, कहानी कुछ और ही है। पाकिस्तान के


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    By Azad Hind Desk फरवरी 27, 2026
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    नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भीषण जंग शुरू हो गई है। पाकिस्तानी फौज ने जोरदार हमला बोल दिया है। पाकिस्तान ने गजब लिक हक नाम का एक ऑपरेशन चलाया है। वहीं, तालिबान ने इस्लामाबाद पर ड्रोन हमला करके पाकिस्तान की हवा खराब कर दी है। मगर, कहानी कुछ और ही है।
    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि हमें लगा था कि 2021 में अफगानिस्तान से नाटो देशों के जाने के बाद से शांति आएगी, मगर तालिबान ने अफगानिस्तान को भारत की कॉलोनी बना दिया।
    इसके पीछे बड़ी वजह कुछ और भी हैं। दरअसल, पाकिस्तान की नजर डूरंड लाइन के पास स्थित अफगानिस्तान के उत्तर पूर्वी इलाके में स्थित रणनीतिक वाखान कॉरिडोर पर है, जिसे अफगानिस्तान का ‘चिकननेक’ कहा जाता है।
    पाकिस्तान और चीन दोनों ही इस पर कब्जा करके हासिल करना चाहते हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान का बगराम सैन्य बेस हथियाने का नापाक इरादा रखते हैं। ऐसे में यह भारत के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

    वाखान कॉरिडोर क्या है, जिस पर है चीन-पाक की नजर

    • विकीपीडिया के अनुसार, वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत के वाखान जिले में है। यह गलियारा पूर्व की ओर फैला है, जो अफगानिस्तान को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है।
    • यह गलियारा 13 से 64 किलोमीटर चौड़ा है और करीब 350 किलोमीटर लंबा है। यह ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य और पूर्व सोवियत संघ के बीच बफर जोन हुआ करता था।
    • वहीं, इस कॉरिडोर की घाटी उत्तर में ताजिकिस्तान के गोर्नो-बदख्शां स्वायत्त क्षेत्र से जुड़ती है तो वहीं दक्षिण में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान प्रशासित गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से अलग करती है।
    • यह ऊंची पर्वतीय घाटी है, जो पंज और पामीर नदियों का स्रोत है। ये दोनों मिलकर विशाल आमू दरिया नदी बनाती हैं। शताब्दियों से एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग इस घाटी से होकर गुजरता रहा है, जिससे पूर्वी, दक्षिणी और मध्य एशिया से आने-जाने वाले यात्रियों की आवाजाही सुगम होती रही है। चीन इसलिए भी इस पर कब्जा करना चाहता है।

    डूरंड लाइन समझौते के बाद वजूद में आया कॉरिडोर

    • 1893 के डूरंड लाइन समझौते और 1895 के पामीर सीमा आयोग प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर के बाद वाखान मिरडोम से इस गलियारे का निर्माण हुआ। इसके पीछे उस समय वजह यह थी कि रूसी तुर्किस्तान उपनिवेश (अब ताजिकिस्तान) ब्रिटिश उपनिवेश रहे पाकिस्तान को न छुए।
    • इस समझौते ने डूरंड लाइन भी बनाई, जो आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा बनाती है। इसे पहले 1763 में दुर्रानी साम्राज्य के अहमद शाह दुर्रानी ने जीत लिया था। इसका पूर्वी छोर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से सटा हुआ था, जिस पर उस समय किंग राजवंश का दावा था।

    भारत को घेरने की साजिश रच रहे हैं पाक-चीन

    • मीडिया रिपोर्ट्स पाकिस्तान और चीन अफगानिस्तान के रणनीतिक वाखान कॉरिडोर पर कब्जा करके भारत को घेरने की साजिश रच रहे हैं। वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान को चीन के शिनजियांग से पूर्व की ओर जोड़ता है।
    • एक वरिष्ठ पाकिस्तानी विश्लेषक के अनुसार, पाकिस्तान-चीन दोनों देशों के लिए यह रणनीतिक महत्व रखता है। यह चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के लिए अहम रास्ता बन सकता है, जो मध्य एशिया से सीधे जोड़ता है।

    रूसी एक्सपर्ट ने कहा-यह ट्रंप का ब्रिक्स देशों पर हमला

    • रूस में Russian geopolitical school and Eurasian Movement के फाउंडर अलेक्जेंडर ड्यूगिन ने कहा है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान युद्ध ट्रंप द्वारा घोषित ब्रिक्स देशों पर हमला है। अफगानिस्तान के पीछे भारत है। पाकिस्तान के पीछे चीन है। जनजातियों का यह इलाका मुख्य रूप से पश्तूनों से आबाद है, जो अफगानिस्तान में सत्ताधारी बहुमत हैं। पश्तून तालिबान (कट्टरपंथी सलाफी) हैं।
    • दरअसल, BRICS में ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति कई मौकों पर ब्रिक्स को बेकार बता चुके हैं। वह नहीं चाहते हैं कि ब्रिक्स के बहाने रूस-भारत और चीन का कोई गठजोड़ बने।

    बगराम एयरबेस फिर से हासिल करना चाहता है अमेरिका

    • मीडिया रिपोर्टों के अनुसा, पाकिस्तान और चीन दोनों सहयोगी देश इस महत्वपूर्ण गलियारे पर कब्जा करने में सफल हो जाते हैं, तो इससे चीन को पाकिस्तान तक सीधी पहुंच मिल जाएगी, जबकि पाकिस्तान को ताजिकिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंच आसान हो जाएगी।
    • 2021 में जब अमेरिकी और NATO फौजों के जाने के बाद अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता संभाली थी, तब इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि उसे वाखान गलियारे तक आसान पहुंच मिल जाएगी, लेकिन तब से दोनों देशों के संबंध बेहद खराब ही चल रहे हैं।
    • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते साल सितंबर में बगराम एयरबेस को फिर से हासिल करने का इरादा जता चुके हैं। वह चाहते हैं कि इस क्षेत्र में ऐसे हालात बन जाएं, ताकि बगराम अमेरिका को मिल जाए।

    भारत के लिए अफगानिस्तान का चिकननेक क्यों महत्वपूर्ण है

    • वर्तमान में, गिलगित-बाल्टिस्तान मार्ग चीन और पाकिस्तान के बीच एकमात्र व्यापार मार्ग है। हालांकि, भारत ने वैश्विक मंचों पर इस पर आपत्ति जताई है।
    • दरअसल, नई दिल्ली इस क्षेत्र को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का हिस्सा मानती है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। ऐसे में भारत यह कतई नहीं चाहेगा कि उसके सिर पर चीन या पाकिस्तान मजबूती से जड़ें जमा लें।

    दबंग चीन को किस बात का है डर

    • चीन को डर है कि भारत भविष्य में इस व्यापार मार्ग को ब्लॉक कर सकता है। ऐसे में अगर बीजिंग और इस्लामाबाद वाखान गलियारे पर नियंत्रण हासिल करने में सफल हो जाते हैं, तो इससे उन्हें व्यापार के लिए एक वैकल्पिक मार्ग और एक-दूसरे तक पहुंच मिल जाएगी।
    • इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग को डर है कि अफगानिस्तान के चरमपंथी तत्व वाखान कॉरिडोर के रास्ते चीन में प्रवेश कर सकते हैं और शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुसलमानों के बीच अपनी कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा फैला सकते हैं।
    • चीन में जातीय उइघुरों के खिलाफ अत्याचारों को लेकर अफगानिस्तान में भी असंतोष बरसों से पनप रहा है। ऐसे में चीन के कब्जा करने से आतंकी चीन में नहीं घुस पाएंगे।

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