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  • पाकिस्तान ने भारत को दी अपने परमाणु ठिकानों की जानकारी, भारत ने भी सौंपी लिस्ट, जानें वजह

    इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान ने अपने परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की जानकारी एक-दूसरे को दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को यह बताया है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद और नई दिल्ली ने अपने-अपने न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन की लिस्ट का आदान-प्रदान किया। यह साल 1988 में दोनों देशों के बीच


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    By Azad Hind Desk जनवरी 1, 2026
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    इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान ने अपने परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की जानकारी एक-दूसरे को दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को यह बताया है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद और नई दिल्ली ने अपने-अपने न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन की लिस्ट का आदान-प्रदान किया। यह साल 1988 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत हर साला होने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे गुरुवार को पूरा किया गया।

    ताहिर अंद्राबी ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान में न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी की लिस्ट आज ऑफिशियली फॉरेन ऑफिस में इंडियन हाई कमीशन के रिप्रेजेंटेटिव को सौंप दी गई। भारत ने भी आज ही नई दिल्ली में हमारे हाई कमीशन के साथ इंडियन न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन की लिस्ट शेयर कर दी है।

    कैदियों की लिस्ट भी सौंपी गई

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत और पाकिस्तान ने न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी के बारे में जानकारी के अलावा कैदियों की लिस्ट का भी एक्सचेंज किया है। भारत ने अपनी कस्टडी में मौजूद पाकिस्तानी कैदियों की लिस्ट दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन को दी है।

    पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में इंडियन हाई कमीशन को 257 इंडियन कैदियों (58 सिविल और 199 फिशरमैन) की लिस्ट सौंपी है। कॉन्सुलर एक्सेस एग्रीमेंट 2008 के फॉलोइंग में दोनों साइड जनवरी और जुलाई को एक-दूसरे की कस्टडी में मौजूद कैदियों की लिस्ट शेयर करनी होती है।

    क्यों दी न्यूक्लियर ठिकानों की जानकारी

    भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं पर हमले के प्रतिबंध से जुड़ा समझौता है। इसी के तहत लिस्ट साझा की गई है। यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को साइन किया गया था और 27 जनवरी 1991 से लागू हुआ। समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान हर साल 1 जनवरी को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की जानकारी एक-दूसरे को देना जरूरी है। पहली बार यह सूची 1 जनवरी 1992 को साझा की गई थी।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से एक बार फिर सिंधु जल संधि (IWT) पर भी बात की गई है। पाकिस्तान ने कहा है कि भारत पश्चिमी नदियों पर एकतरफा कोई भी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बनाने के लिए अपनी सीमित छूट का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता है। अंद्राबी ने ये बातें भारत की ओर से कश्मीर के किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट के दुलहस्ती स्टेज-II हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को मंजूरी से जुड़े सवाल पर कही।

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