सरबजीत कौर बीते साल नवम्बर में सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ पाकिस्तान गई थीं। पाकिस्तान पहुंचकर सरबजीत गायब हो गईं, जिसने एजेंसियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। कुछ दिनों बाद जानकारी आई कि उन्होंने एक पाकिस्तानी शख्स से शादी कर ली है। यह भी बताया गया कि उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया है और अपना नाम नूर फातिमा कर लिया है। उनकी कथित तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए।
सरबजीत को पाकिस्तान जाने पर किया मजबूर
अब भारत में उनके पति करनैल सिंह ने बताया है कि सरबजीत कौर सोशल मीडिया के जरिए नासिर हुसैन नाम के पाकिस्तानी शख्स के संपर्क में थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि हुसैन ने उन्हें बहकाया और फिर ब्लैकमेल करके मजबूर किया। CNN-न्यूज18 से उन्होंने कहा कि हुसैन ने सरबजीत के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड कीं और उनके जरिए ब्लैकमेल करने लगा।
करनैल सिंह ने दावा किया कि सरबजीत को पाकिस्तान जाने पर मजबूर किया गया। सिंह ने खुलासा किया कि हुसैन ने सरबजीत के परिवार को डराने के लिए बार-बार आपत्तिजनक सामग्री भेजी। न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में सरबजीत की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग मिलने की बात कही है जिसमें वह मदद की गुहार लगाती दिख रही हैं। सरबजीत ने भारत लौटने की इच्छा जताई है और कहा है कि वह आजाद नहीं हैं।
लाहौर हाईकोर्ट में सरबजीत मामले की सुनवाई
ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब फिलहाल लाहौर कोर्ट में सरबजीत कौर को डिपोर्ट किए जाने पर सुनवाई चल रही है। हाई कोर्ट तीर्थयात्रा वीजा के कथित गलत इस्तेमाल और सरबजीत कौर की शादी की वैधता की जांच कर रहा है। मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय, संघीय जांच एजेंसी और पंजाब पुलिस समेत कई सरकारी संस्थानों से रिपोर्ट मांगी गई है।
पाकिस्तान सरकार बनी वापसी में बाधा
इसके पहले पिछले सप्ताह जानकारी सामने आई कि पाकिस्तान से सरबजीत कौर को भारत डिपोर्ट किए जाने की तैयारी कर रही थी। उनका मेडिकल भी हो गया था, जिसमें फिट पाया गया था। उन्हें वाघा बॉर्डर पर भारतीय अधिकारियों को सौंपा जाना था, लेकिन पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने स्पेशल ट्रैवल परमिट या एनओसी जारी नहीं किया। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं और लड़कियों को अगवा कर उनके साथ जबरन शादी किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। लेकिन भारत से धार्मिक जत्थे पर गई महिला को अगवा करके उससे निकाह करने की घटना एक दुर्लभ मामला है। इसने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बारे में चिंता को फिर से जगा दिया है।














