कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत दौरे के पहले चरण में मुंबई में भारतीय और कनाडाई व्यापारियों, उद्योग और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण हस्तियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा, भारत और कनाडा के बीच व्यापार, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
पश्चिम एशिया पर हो सकती है चर्चा
मोदी और कार्नी के बीच आज होने वाली इस बैठक में पश्चिम एशिया में युद्ध के परिणामों, मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत के विपरीत, कनाडा ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन किया है।
दोनों देशों के लिए बड़ा अवसर
भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों के लिए यह बड़ा अवसर है। हमें और भी अधिक ऊंचे लक्ष्य रखने चाहिए, हम ऐसा कर रहे हैं। भारत-कनाडा की साझेदारी और अधिक रणनीतिक होनी चाहिए। इसीलिए, पिछले साल मेरे चुनाव के तुरंत बाद, हमारी सरकार ने भारत के साथ अपने संबंधों को नवीनीकृत करने का प्रयास किया।’
यूरेनियम पर हो सकता है समझौता
कनाडा में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और कार्नी ने मुक्त व्यापार समझौते का मार्ग व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त करने के प्रयासों को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। इस दौरे के दौरान भारत द्वारा कनाडा से यूरेनियम खरीद से जुड़ा बहु-अरब डॉलर का समझौता भी प्रमुख उपलब्धि हो सकता है।
हाल में कार्नी ने कहा कि इस यात्रा के दौरान, कनाडा उन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहां वह भारत के साथ मिलकर अपने लोगों के लिए अधिक संप्रभुता, अधिक विकल्प और अधिक समृद्धि का सृजन कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘कनाडा की खाद्य और ऊर्जा महाशक्ति होने की स्थिति को देखते हुए, इसकी शुरुआत स्वाभाविक रूप से खाद्य और ऊर्जा से होती है।’
उन्होंने आगे कहा कि यह परमाणु सहयोग तक भी विस्तारित है, जिसमें बड़े पैमाने पर रिएक्टरों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के निर्माण के लिए यूरेनियम का सबसे विश्वसनीय दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता होना शामिल है।














