स्नान के साथ दान का विशेष महत्व- पौष पूर्णिमा से प्रारम्भ कर माघ में स्नान के साथ दान का विशेष महत्व है। मनोवांछित फल की कामना रखने वालों को अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करना चाहिए। जाड़ा होने के कारण कंबल आदि ऊनी वस्त्रों का दान इस समय विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। जो लोग पूरे महीने दान न कर पाएं वे कम से कम पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन ही दान करके अपना लोक-परलोक संवार सकते हैं। माघ मास में स्नान, दान, उपवास व भगवान माधव की पूजा अत्यंत फलदायी बताई गई है। महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित है
दशतीर्थसहस्त्राणि तिस्त्रः कोट्यस्तथा पराः। समागच्छन्ति माघ्यां तु प्रयागे भरतर्षभ।।
माघमासं प्रयागे तु नियतः संशितव्रतः। स्नात्वा तु भरतश्रेष्ठ निर्मलः स्वर्गमाप्नुयात्।
माघ मास में प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार अन्य तीर्थों का समागम होता है, अतः जो नियमपूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हुए माघमास में प्रयाग में स्नान करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाता है।
पौष पूर्णिमा पर बढ़ाएं चन्द्र बल- जिनके उपर जन्मकुण्डली में चन्द्रमा की महादशा चल रही हो अथवा जिन्हें मानसिक उलझनें अधिक रहती हों, उन्हें नौ रत्ती का मोती दाहिने हाथ की सबसे छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी में जड़वाकर प्राण-प्रतिष्ठा करवाकर पौष पूर्णिमा के दिन अवश्य धारण करना चाहिए। विशेष लाभ के लिए हाथ की अपेक्षा गले में अर्द्धचन्द्राकार रूपी लॉकेट में मोती जड़वाकर धारण करें।














