आईएएनएस से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘मुझे हमेशा से ओम पुरी बेहद पसंद रहे हैं; उनका काम शानदार था। उन्होंने अपने करियर में जो रास्ता अपनाया, जो किरदार निभाए, वो किसी असली हीरो से कम नहीं था। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि रोल बड़ा है या छोटा, बस इस बात पर जोर दिया कि किरदार कैसे निभाया जाए। यही सोच मैंने अपनी कैमियो भूमिका में अपनाई।’
‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ सीरीज की कहानी
‘फ्रीडम एट मिडनाइट 2’ सीरीज में अभिषेक का किरदार एक ऐसे आदमी का है, जो अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को सांप्रदायिक हिंसा में खो देता है। उसका किरदार बदले की भावना से भरा है, लेकिन कहानी उसे अंततः महात्मा गांधी के सामने आत्मसमर्पण की ओर ले जाती है। यह कहानी केवल पर्सनल दुख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय की धार्मिक और सामाजिक जटिलताओं को भी दर्शाती है।
फिल्म का निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया
यह किरदार ऐतिहासिक रूप से भी खास है, क्योंकि इसकी भावना ओम पुरी द्वारा फिल्म ‘गांधी’ (1982) में निभाए गए किरदार को दर्शाती है। इस फिल्म में बेन किंग्सले मुख्य भूमिका में थे और फिल्म का निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था।
‘ओम पुरी साहब का कोई रिप्लेसमेंट कभी नहीं हो सकता’
अभिषेक ने कहा, ‘जब निर्देशक निखिल ने मुझे यह रोल ऑफर किया, तो मैंने तुरंत हां कर दी। मेरा मानना है कि इंडस्ट्री की असली भावना यह है कि कलाकार को हमेशा अपनी भूमिका निभाने का मौका मिलना चाहिए, चाहे वह रोल छोटा ही क्यों न हो।’ अभिषेक ने कहा, ‘ओम पुरी साहब का कोई रिप्लेसमेंट कभी नहीं हो सकता, और मैं इसे कभी उस नजरिए से नहीं देखता। ओम पुरी एक सिनेमा के आइकॉन हैं और उनके नक्शेकदम पर चलना अपने आप में सम्मान की बात है। छोटे रोल कभी-कभी सबसे बड़ा असर छोड़ते हैं, और फ्रीडम एट मिडनाइट 2 के रिलीज के बाद मुझे सोशल मीडिया पर दर्शकों की ओर से काफी तारीफ मिली।’
फ्रीडम एट मिडनाइट 2′ सोनी लिव पर
सीरीज के दूसरे सीजन में विभाजन के बाद के समय की अशांति, सांप्रदायिक हिंसा, शरणार्थियों की समस्या, रियासतों का विलय और नेताओं के बीच राजनीतिक तनाव को भी दिखाया गया है। ‘फ्रीडम एट मिडनाइट 2’ सोनी लिव पर स्ट्रीम हो रही है।














