द जकार्ता पोस्ट ने बताया है कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इंडोनेशिया ने हाल के सालों में फ्रांसीसी रक्षा कंपनियों के साथ कई डील की हैं। फ्रांस के साथ 2021 में किए गये समझौते के तहत, इंडोनेशिया ने कुल 8.1 अरब डॉलर में 42 राफेल फाइटर जेट का ऑर्डर दिया था, जिसकी डिलीवरी अब शुरू की गई है। आपको बता दें कि इंडोनेशिया, दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला इस्लामिक देश है और पाकिस्तान ने दावा किया था कि वो इंडोनेशिया को अपना JF-17 लड़ाकू बेचने वाला है। हालांकि ये दावा फर्जी साबित होने की संभावना है। इंडोनेशिया ने 2021 में पेरिस के साथ साइन किए गए रक्षा सहयोग समझौते के दौरान, फ्रांस के नेवल ग्रुप से दो स्कॉर्पीन-क्लास अटैक सबमरीन का भी ऑर्डर दिया था।
फ्रांस ने इंडोनेशिया को सौंपे तीन राफेल फाइटर जेट
रिपोर्ट के मुताबिक नेवल ग्रुप ने एक बयान में कहा है कि 18 टॉरपीडो और मिसाइल ले जाने में सक्षम डीजल-इलेक्ट्रिक स्कॉर्पीन पनडुब्बियां इंडोनेशिया के PT PAL शिपयार्ड में बनाई जाएंगी। डील के तहत, नेवल ग्रुप अपनी टेक्नोलॉजिकल जानकारी ट्रांसफर करेगा, जबकि “मैनेजमेंट, ऑपरेशन और मेंटेनेंस इंडोनेशिया में” इंडोनेशियाई अधिकारियों की तरफ से किए जाएंगे। जबकि राफेल को लेकर सैन्य ब्रिगेडियर सिराइट ने कहा कि तीनों एयरक्राफ्ट शुक्रवार को आए और उन्हें सुमात्रा के पश्चिमी द्वीप पर पेकानबारू में रोएसमिन नुरजादिन एयर बेस पर तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि इस साल के आखिर में और जेट आने की उम्मीद है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने आएंगे। इंडोनेशिया इंटरनेशनल फाइटर जेट मार्केट में सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक रहा है। फिलहाल इंडोनेशिया अपने लड़ाकू विमानों के स्क्वार्डर्न को मजबूत बना रहा है और अपग्रेडेशन पर करोड़ों खर्च कर रहा है।
हालांकि इंडोनेशिया राफेल फाइटर जेट के साथ कुछ और विदेशी विमानों में भी दिलचस्पी रखता है। यह राफेल के साथ-साथ कई दूसरे ऑप्शन पर भी विचार कर रहा है, जिसमें चीन के J-10 फाइटर जेट और अमेरिका में बने F-15EX जेट शामिल हैं। इंडोनेशिया ने तुर्की से 48 KAAN फाइटर जेट खरीदने के लिए भी एक समझौता साइन किया है, लेकिन तुर्की के KAAN लड़ाकू विमान पर अब संकट के बादल छा गये हैं। तुर्की ने KAAN फाइटर जेट के इंजन के लिए अमेरिका से सौदा किया था, लेकिन अब अमेरिका ने उसे इंजन देने में आनाकानी दिखानी शुरू कर दी है। जिससे मजबूर होकर खुद तुर्की ने यूरोफाइटर खरीदने के लिए ब्रिटेन से समझौता किया है। यह पांचवीं पीढ़ी का एयरक्राफ्ट है जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक F-110 इंजन लगाए जाने हैं, जिनका इस्तेमाल चौथी पीढ़ी के लॉकहीड मार्टिन F-16 जेट में भी होता है।














