अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नाटो सैनिकों के अफगानिस्तान में योगदान पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा, ‘नाटो सैनिकों ने अमेरिका की मदद नहीं की, वे अफगानिस्तान में अग्रिम पंक्ति से पीछे रहे। मुझे यकीन नहीं है कि अगर अमेरिका को जरूरत पड़ी तो नाटो उसके साथ खड़ा होगा।’ ब्रिटेन के पीएम सर कीर स्टार्मर ने इसे अपमानजनक और शर्मनाक बताते हुए ट्रंप से माफी की मांग की।
ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर स्टार्मर के अलावा अफगानिस्तान में सेवा दे चुके सैनिकों के परिवारों, पूर्व सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रम्प से माफी मांगने की मांग की। प्रिंस हैरी ने भी ब्रिटिश सैनिकों के बलिदानों का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने याद दिलाया कि 9/11 हमलों के बाद नाटो ने अमेरिका का साथ दिया था।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति से शनिवार को बात की। इस बातचीत में अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो सेनाओं के साथ ब्रिटेन की भागीदारी पर चर्चा हुई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान में लड़ने वाले ब्रिटिश सैनिकों का जिक्र किया। इसके बाद अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने माफी नहीं मांगी लेकिन अपने पुराने बयान को बदल दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा है
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘यूके के महान और बहुत बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ रहेंगे। अफगानिस्तान में 457 सैनिक मारे गए। कई बुरी तरह घायल हुए और वे सभी योद्धाओं में महानतम थे। यह एक ऐसा बंधन है, जो कभी नहीं टूटेगा। यूके की सेना जबरदस्त हिम्मत और जज्बे के साथ लड़ती है और किसी से कम नहीं (अमेरिका को छोड़कर) है।
ब्रिटेन की कंजर्वेटिव नेता केमी बेडेनॉक ने कहा कि वह खुश हैं कि ट्रंप ने अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर लड़ने में ब्रिटेन की भूमिका को स्वीकार किया। हालांकि इस पर सवाल कभी उठाया ही नहीं जाना चाहिए था लेकिन ट्रंप के बदले रुख से हम अच्छा महसूस कर रहे हैं।













