विशेषज्ञों के मुताबिक, पकिस्तानी एयरफोर्स (PAF) चीन को 60 से 70 J-10CE मल्टीरोल फाइटर जेट का ऑर्डर देने पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही 40 J-35 स्टील्थ लड़ाकू विमानों को सेवा में शामिल करने की योजना पर भी पीएएफ काम कर रही है। J-10CE और J-35 के संयुक्त अधिग्रहण की योजना को भारत के बढ़ते राफेल बेड़े का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान की मुख्य रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राफेल से निपटने की चुनौती
पीएफ के सूत्रों का मानना है कि भारतीय एयरफोर्स में 114 राफेल विमानों को शामिल करने के प्लान के बाद पाकिस्तान को अपनी वायु श्रेष्ठता रखने के लिए अपने उच्च-स्तरीय लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ानी होगी। ऐसे में उसने 60 से 70 अतिरिक्त J-10CE लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया है।
पाकिस्तान का लक्ष्य 40 J-35 स्टील्थ फाइटर का बेड़ा तैयार करने का भी है। इससे वे अपनी वायु सेना में पांचवीं पीढ़ी की क्षमता ला सकेंगे और भारत के भविष्य के एएमसीए (AMCA) कार्यक्रम का मुकाबला कर सकेंगे। एक बार शामिल होने के बाद J-35 पीएएफ का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान बन जाएगा। पाकिस्तान फिलहाल F-16 बेड़े पर ज्यादा निर्भर है।
पाकिस्तान की भविष्य पर नजर
पाकिस्तान की J-10CE और J-35 के संयोजन को एयरफोर्स का हिस्सा बनाना भविष्य को देखते हुए उठाया जा रहा कदम है। यह अगले दो दशकों तक पाकिस्तानी एयरफोर्स को ताकत देंगे। साथ ही पीएएफ प्रोजेक्ट एजम में भारी निवेश करने की योजना बना रही है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य JF-17 का एक उन्नत संस्करण विकसित करना है, जिसमें बेहतर स्टील्थ, एवियोनिक्स और प्रोपल्शन सिस्टम होंगे।
एक्सपर्ट का कहना है कि भारतीय वायुसेना की 114 राफेल खरीदने की योजना और पाकिस्तानी एयर फोर्स में J-10CE और J-35 को लाने का प्लान दक्षिण एशिया में वायु शक्ति प्रतिस्पर्धा के एक नए चरण की शुरुआत होगी। भारत और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को ध्यान में रखते हुए हथियार खरीदते रहे हैं। बीते साल के मई के चार दिन के सैन्य सघर्ष के बाद ये स्पर्धा और ज्यादा बढ़ सकती है।












